बलरामपुर, छत्तीसगढ़ अगस्त 2025 की यह बात है। छत्तीसगढ़ प्रदेश का जिला बलरामपुर लगता है। यहां का एक थाना लगता है कुसुमी और कुसुमी का एक गांव लगता है कंजिया। लगभग 60 साल की एक महिला नाम ललकी बाई होता है। वो सीधा कुसमी थाने में जाती है और जाने के बाद रोने लगती है। जैसे रो रही थी तो अधिकारी ने उसे शांत कराया। शांत कराने के बाद उससे पूछा कि अम्मा क्या बात है? तुम इतनी परेशान क्यों हो रही हो? वो कहती है कि साहब मैं बहुत ही गरीब हूं और किसी तरह से बकरियां चराकर अपने परिवार का भरण पोषण करती हूं। एक साहब ने मेरे बेटों की नौकरी लगवाने के नाम पर ₹72 लाख ले लिए। ना तो पैसे वापस करते हैं और ना ही मेरे बेटों की नौकरी लग रही है।
जैसे ही पुलिस के अधिकारियों ने यह बात सुनी तो बड़ा आश्चर्य हो रहा था कि इस बुजुर्ग महिला के पास ₹72 लाख कहां से आए? उन्हें लगा कि शायद यह महिला का कुछ दिमाग खराब हो गया है। इसलिए उन्होंने आराम से उस महिला को समझाया, बुझाया और कहा कि अम्मा घर चली जाओ। अम्मा घर जरूर चली जाती है। लेकिन वह शांत नहीं बैठती। कुछ दिन बीत जाते हैं। लगभग 2 महीने का समय बीत जाता है। उसके बाद फिर प्रधानमंत्री ऑफिस से यानी कि नरेंद्र मोदी जी के ऑफिस से एक लेटर आता है और जब लेटर चलना शुरू करता है तो उसी थाने में पहुंच जाता है। जब उस थाने में पहुंचता है तो पुलिस इस मामले की जांच पड़ताल करती है और जांच पड़ताल करती है तो वाकई सचमुच उस महिला के ₹72 लाख गए थे।
पुलिस ने इस मामले का जब खुलासा किया तो इस खुलासे के बाद पूरे देश भर में चर्चा शुरू हो जाती है कि पुलिस के उस बड़े अधिकारी ने ऐसा क्यों किया? आज की इस कहानी के माध्यम से यही बताने की कोशिश करते हैं कि आखिरकार पूरी कहानी क्या है?
यह सच्ची घटना शुरू होती है मध्य प्रदेश के जिला पन्ना से। जिला पन्ना की एक तहसील है जिसका नाम है अजयगढ़। और अजयगढ़ तहसील का एक गांव लगता है देवगांव। देवगांव में एक राजमस्त्री जिनका नाम जानकी पटेल होता है। उनके दो बेटे और एक बेटी होती है। एक बेटा जिसका नाम संतोष कुमार पटेल होता है जो शुरू से ही पढ़ने में बेहद होशियार होता है।… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें