जवाहर नगर, हैदराबाद यह हैदराबाद शहर की बात है। एक लड़का स्कूटर पर जा रहा था। गलती से उसने लाल बत्ती पार कर दी। जैसे ही उसने सिग्नल क्रॉस किया, पास खड़े पुलिसकर्मियों ने उसे इशारा करके रोक लिया। लड़का तुरंत रुक गया।
रुकने के बाद पुलिसकर्मियों ने कहा, “तुम्हारा चालान कटेगा, क्योंकि तुमने लाल बत्ती पार की है।” लड़के ने काफी विनती की और कहा, “साहब, मुझसे गलती हो गई, कृपया माफ कर दीजिए। आगे से ऐसी गलती नहीं होगी।” लेकिन पुलिसकर्मियों का रुख सख्त था। उन्होंने साफ कह दिया कि चालान तो कटेगा ही।
आखिरकार लड़के ने कहा, “ठीक है साहब, गलती हुई है तो चालान काट दीजिए, मैं जुर्माना देने के लिए तैयार हूं।” जब चालान की प्रक्रिया शुरू हुई, तो उससे पूछा गया कि स्कूटर किसके नाम पर है। लड़के ने कहा, “यह स्कूटर मेरा है और मेरे ही नाम पर है।”
इस पर पुलिसकर्मियों ने कहा, “नहीं, यह स्कूटर तुम्हारे नाम पर नहीं, बल्कि ‘अंजू’ के नाम पर है। अंजू कौन है? उससे बात कराओ।” अंजू का नाम सुनते ही लड़का घबरा गया। उसने कहा, “साहब, मैंने यह स्कूटर हाल ही में एक जान-पहचान वाले से खरीदा है।”
पुलिस ने कहा, “ठीक है, उस व्यक्ति से बात कराओ।” जब उस व्यक्ति से संपर्क करने की बात आई, तो पुलिस को शक होने लगा कि कहीं यह स्कूटर चोरी का तो नहीं है। उन्हें लगा कि लड़का स्कूटर चुराकर भागने की कोशिश कर रहा था, इसलिए उसने सिग्नल तोड़ा।
पुलिस ने सख्ती से पूछताछ जारी रखी। आखिरकार, जिससे स्कूटर खरीदा गया था, उसे भी सामने आना पड़ा। उसने कहा, “साहब, स्कूटर मैंने ही बेचा था।” पुलिस ने पूछा, “यह स्कूटर किसका है? तुमने इसे क्यों बेचा?”
जब उस लड़के के परिवार की जानकारी जांची गई, तो पता चला कि उसकी मां या किसी भी रिश्तेदार का नाम ‘अंजू’ नहीं है। तब पुलिस ने फिर पूछा, “बताओ, यह अंजू कौन है?”
आखिरकार लड़के ने बताया, “साहब, अंजू मेरी सास का नाम है।”… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें