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Crime

तेली मोहल्ले का वो बंद कमरा: एक सनकी पिता की दास्तां | लाश के साथ गुज़ारे वो दिन

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मेरठ, उत्तर प्रदेश
करीब 76 साल के एक बुजुर्ग व्यक्ति थे, जो यूपी बोर्ड में प्रशासनिक पद पर कार्यरत थे। सेवानिवृत्त (Retire) होने के बाद वह अपनी पत्नी और इकलौती बेटी के साथ रह रहे थे। कुछ समय पहले पत्नी का देहांत हो गया, जिसके बाद घर में केवल वह और उनकी बेटी ही रह गए थे। जिंदगी सामान्य चल रही थी, लेकिन न जाने कब और कैसे, अचानक उनकी बेटी की भी मृत्यु हो गई।

बेटी की मौत ने उन्हें सुध-बुध खोने पर मजबूर कर दिया। वह समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर क्या करें—आस-पास के लोगों को सूचित करें या नहीं, अंतिम संस्कार करें या न करें? वह इस चिंता में डूब गए कि अब आगे की जिंदगी अकेले कैसे कटेगी। इसी उधेड़बुन में उन्हें फैसला लेने में करीब 24 घंटे बीत गए।

24 घंटे बाद शव से दुर्गंध आने लगी। घर में कुछ परफ्यूम रखे थे, जिनका इस्तेमाल उन्होंने गंध दबाने के लिए किया। उन्हें अहसास हुआ कि यह गंध आने वाले दिनों में और बढ़ेगी, इसलिए वह बाजार गए और भारी मात्रा में परफ्यूम खरीद लाए। चूंकि वह पड़ोसियों से ज्यादा मेल-जोल नहीं रखते थे, इसलिए किसी को भनक तक नहीं लगी।

वह रोज अपनी मृत बेटी के शव की साफ-सफाई करते, उसे नहलाते और इस उम्मीद में बैठे रहते कि शायद वह जीवित हो जाए। वह तंत्र-मंत्र में भी गहरा विश्वास रखते थे, इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि कोई चमत्कार होगा। पेंशन की वजह से आर्थिक तंगी तो नहीं थी, लेकिन अकेलेपन का डर उन्हें खाए जा रहा था। वह तांत्रिकों से भी मिले ताकि उनकी बेटी की आत्मा वापस लौट आए।

इसी तरह पाँच दिन गुजर गए। जब दुर्गंध असहनीय हो गई, तो उन्होंने वह किया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने मुख्य द्वार पर ताला लगाया और वहां से निकल गए। इस बात को करीब साढ़े चार महीने बीत गए। साढ़े चार महीने बाद वह दरवाजा अचानक खुला—बल्कि खुलवाया गया। अगर उनके एक रिश्तेदार ने लड़की के बारे में पूछताछ न की होती, तो शायद यह राज कभी सामने नहीं आता।

इतने समय में लड़की का शरीर पूरी तरह गलकर कंकाल बन चुका था, बस पैर का एक छोटा सा हिस्सा बचा था। कैसे वह कंकाल बाहर आया, कैसे यह खौफनाक सच्चाई लोगों के सामने आई और उस 76 साल के बुजुर्ग की असल मंशा क्या थी—आज की इस कहानी के माध्यम से जानते हैं।

उत्तर प्रदेश के मेरठ का एक थाना है—सदर बाजार। इसी थाना क्षेत्र का एक मोहल्ला है, ‘तेली मोहल्ला’। वहां के रहने वाले एक युवक, विश्वजीत विश्वास के पास एक व्यक्ति आकर कहता है, “आज मैंने तुम्हारे चाचा जी को पास के ही बेगम बाग स्थित भैंसाली डिपो की एक दुकान पर चाय पीते देखा है। वहां वह ई-रिक्शे वालों के साथ खड़े होकर गप्पे हांक रहे थे।” जैसे ही… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें