महेवाघाट, उत्तरप्रदेश यह बात साल 2024 की है। एक महिला, जिसका नाम अंकिता तिवारी था, अचानक गायब हो जाती है। उसके पति, जिसका नाम राजू तिवारी है, उसे घर और आसपास हर जगह ढूंढते हैं, लेकिन अंकिता का कोई अता-पता नहीं चलता।
राजू तिवारी अपनी मां, पिता, बहन और अन्य रिश्तेदारों से पूछताछ करता है, लेकिन किसी को भी उसके बारे में कोई जानकारी नहीं होती। इसके बाद वह अंकिता के मायके फोन करता है और बताता है कि वह घर से लापता है। मायके वाले साफ-साफ इनकार कर देते हैं कि वह उनके यहां नहीं आई है। इसके बाद दोनों पक्ष मिलकर उसकी तलाश शुरू करते हैं।
तीन दिन बीत जाते हैं। जिस तरह अंकिता अचानक गायब हुई थी, उसी तरह वह अचानक वापस आ जाती है। लेकिन उसके वापस आते ही उसका पति साफ कह देता है कि वह अब उसे अपने साथ नहीं रखेगा। वह पूछता है कि वह तीन दिन कहां थी और उसे इसका पूरा हिसाब चाहिए।
मामला बढ़ने पर पंचायत बुलाई जाती है, जिसमें ससुराल और मायके दोनों पक्ष के लोग शामिल होते हैं। पंचायत के दौरान अंकिता तिवारी जोर-जोर से रोने लगती है। जब उससे रोने का कारण पूछा जाता है, तो वह बताती है कि उसे बिना किसी वजह के मारा-पीटा जाता है, इसलिए वह अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती।
इस पर अंकिता के माता-पिता उससे विनती करते हैं और कहते हैं कि उसकी शादी को लगभग 8 साल हो चुके हैं, इसलिए उसे घर बचाने की कोशिश करनी चाहिए और यहीं रह जाना चाहिए।
आखिरकार राजू तिवारी उसे साथ रखने के लिए तैयार हो जाता है, लेकिन एक शर्त रखता है। वह कहता है कि वह अपनी पत्नी को तभी रखेगा, जब वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करेगी। उसका कहना था कि उनके बीच ज्यादातर झगड़े मोबाइल और सोशल मीडिया की वजह से होते हैं। वह आरोप लगाता है कि अंकिता हमेशा सोशल मीडिया में व्यस्त रहती है और घर के कामों में ध्यान नहीं देती।… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें