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Crime

सत्तनकुलम कांड: एक बहादुर महिला कांस्टेबल की गवाही ने बदल दी कहानी

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थूथुकुड़ी, तमिलनाडु
19 जून 2020 की रात, लगभग 8:00 बजे का समय था। एक महिला हेड कांस्टेबल, जिसका नाम रेवती था, अपनी ड्यूटी पर वापस आई थी। थाने पहुँचने के बाद वह थानेदार को सैल्यूट करके यह बताना चाहती थी कि वह ड्यूटी पर लौट आई है।

जब उसने थानेदार के बारे में पूछा, तो पता चला कि वह अपने ऑफिस में नहीं हैं, बल्कि किसी से पूछताछ (इंटरोगेशन) कर रहे हैं। पास ही एक कमरे में एक बड़ी मेज रखी थी। उस मेज पर लगभग 31 वर्ष का एक युवक पेट के बल लेटा हुआ था। उसके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था, केवल अंडरवियर था। उसके एक हाथ को एक सिपाही और दूसरे हाथ को दूसरा सिपाही पकड़े हुए था। वहीं एक दरोगा के हाथ में डंडा था, जिससे वह लगातार उस युवक को मार रहा था।

मेज के बिल्कुल पास एक लगभग 60 वर्षीय व्यक्ति बैठा हुआ था। यह दृश्य देखकर महिला हेड कांस्टेबल रेवती घबरा गई और तुरंत पीछे हट गई। वह बाहर खड़ी होकर इंतजार करने लगी ताकि थानेदार के सामने जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा सके।

थानेदार ने उसे देख लिया और अपने ऑफिस में आ गए। रेवती भी उनके पास पहुँची और बोली, “साहब, मैं ड्यूटी पर वापस आ गई हूँ।”

इस पर थानेदार ने कहा, “देखो, जो मारपीट तुमने अभी देखी है, वह यूँ ही नहीं है। यह व्यक्ति बहुत बदमाश है। इसने हमारे एक सिपाही के कपड़े फाड़ दिए और उसे धक्का भी दिया। साथ ही मेज पर रखा सामान भी इधर-उधर फेंक दिया। हम इसे थोड़ा सबक सिखा रहे हैं। अगर तुम चाहो, तो तुम भी जाकर इसे मार सकती हो।”

इस पर रेवती ने साफ मना कर दिया और कहा, “साहब, मैं इसमें शामिल नहीं होना चाहती। आप जो कर रहे हैं, आप करें।” इसके बाद वह वहाँ से हट गई।

उस रात दोनों व्यक्तियों की बुरी तरह पिटाई की गई। वे दोनों बाप-बेटे थे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें बेरहमी से पीटा। 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि जब उन्हें जेल भेजा गया, तो दोनों की मौत हो गई।

उनकी मौत के बाद पूरे प्रदेश में हंगामा मच गया। इस मामले में कई चश्मदीद गवाह थे, लेकिन महिला हेड कांस्टेबल रेवती ने असाधारण साहस दिखाया। वह अदालत में खड़ी हुई और उस रात की पूरी सच्चाई बयान की।

अगर रेवती ने सच न बताया होता, तो नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई संभव नहीं हो पाती और यह मामला एक ऐतिहासिक फैसले तक नहीं पहुँचता। उसने न केवल अपनी नौकरी, बल्कि अपने परिवार और बच्चों को भी खतरे में डालकर सच्चाई का साथ दिया और अपनी हिम्मत नहीं हारी।

यह सच्ची घटना थूथुकुड़ी जिला, तमिलनाडु, भारत के सत्तनकुलम थाना क्षेत्र की है। 18 जून 2020 को, इसी क्षेत्र में कामराज प्रतिमा के पास, लगभग 50 मीटर की दूरी पर एक मोबाइल की दुकान थी। इस दुकान पर लगभग 59 वर्षीय व्यक्ति, पी. जयराज, बैठते थे। यही से इस पूरी घटना की शुरुआत हुई। … पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें

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