हिसार, हरयाणा 1 जुलाई 2025 को जैसे ही कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यालय खुल जाते हैं, प्रार्थना हो रही थी और प्रिंसिपल साहब बच्चों को बता रहे थे कि किस तरह से ध्यान देना है, कैसे पढ़ाई करनी है। इसी बीच में बताते हुए उनकी नजर पहुंच जाती है एक स्टूडेंट पर और जैसे ही प्रार्थना खत्म होती है उस स्टूडेंट से स्पेशली बातचीत करते हैं। कहते हैं कि मैंने तुमसे कहा था तुम फिर भी बाल कटा के नहीं आए। पूरी की पूरी गर्मियों की छुट्टी बीत गई। तुम्हारे माता, तुम्हारे पिता तुम्हें लेकर कितना चिंतित रहते हैं कितना परेशान रहते हैं।
देखो जरा सोच कर कि अगर बड़े होकर तुम आईएएस या आईपीएस ऑफिसर बन जाओगे ना केवल हमारे विद्यालय का नाम रोशन होगा बल्कि हमारे गांव का नाम भी रोशन होगा। पूरे क्षेत्र का नाम रोशन होगा। इसलिए तुम्हें बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। इस तरह की बात समझाकर उस स्टूडेंट को कहा कि अपनी क्लास में चले जाओ। 11वीं क्लास का वो छात्र था और जैसे ही वो क्लास में जाता है तो एक छात्र ने उससे पूछा जो उसका सबसे खास दोस्त था कि प्रिंसिपल साहब क्या कह रहे थे।
उसने कहा प्रिंसिपल क्या कह रहा था। वही रोज की बातें जो पहले कहता था वही अभी कह रहा है कि साफ सुथरे रहा करो। कपड़ों को ठीक से पहना करो। बाल कटा के आया करो। दांत नाखून को ठीक करके आया करो। दांतों को मांझ के आया करो। इस तरह का ज्ञान पेल रहा था। जब यह बात एक स्टूडेंट ने दूसरे स्टूडेंट से कही तो वो ठहाके लगाकर हंसने लगते हैं, मुस्कुराने लगते हैं। अब इसी बीच में अगला दिन निकलता है। प्रिंसिपल साहब ने उसको फिर रोका फिर टोका। अब ना केवल उसको रोका-टोका बल्कि उसके जो दोस्त थे उनको भी रोका टोका। यह चार स्टूडेंट थे जो कि एक ही गांव के रहने वाले थे और इत्तेफाक की बात यह थी कि यह उसी गांव के रहने वाले थे जिस गांव के प्रिंसिपल साहब होते हैं।… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें…