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Crime

फेक आईपीएस और दो बूढ़े पति-पत्नी की रोचक कहानी

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ग्रेटर कैलाश, दिल्ली
10 जनवरी 2026 की सुबह लगभग 11:00 बजे का समय था। लगभग 77 वर्ष की एक बुजुर्ग महिला, जो पेशे से डॉक्टर थीं, अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन पहुँचीं। उस समय उनका मोबाइल फ़ोन चालू था और वे किसी से बातचीत कर रही थीं।

थाने में पहुँचने पर उन्हें वहाँ एक महिला सिपाही दिखाई दी। बुजुर्ग महिला ने महिला सिपाही से बातचीत की और बताया कि एक आईपीएस अधिकारी उनसे बात करना चाहते हैं। यह सुनकर महिला सिपाही ने कहा कि अभी एसएओ साहिबा आने वाली हैं, आप उनसे ही बात कर लीजिएगा।

इस पर बुजुर्ग महिला ने कहा, “नहीं-नहीं, आप ही उनसे बात कर लीजिए।” जैसे ही आईपीएस अधिकारी ने महिला सिपाही से बातचीत शुरू की, महिला सिपाही को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर क्या बात करनी है और क्या जवाब देना है। इसी दौरान महिला एसएओ की एंट्री हो जाती है।

जैसे ही महिला एसएओ से बातचीत शुरू होती है, 77 वर्षीय बुजुर्ग महिला तुरंत अपना फ़ोन उठाकर एसएओ के हाथ में दे देती हैं और कहती हैं, “साहब, एक बार आप बात कर लीजिए। सामने एक आईपीएस अधिकारी हैं, जिनका नाम वी. के. गुप्ता है।”

जैसे ही बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ता है, एसएओ भी पूरी तरह समझ नहीं पा रही थीं कि मामला क्या है। इसी बीच दूसरी तरफ से गाली-गलौज शुरू हो जाती है। उधर से कहा जाता है, “तुम्हें इस स्टेशन का इंचार्ज किसने बनाया? तुम्हें बिल्कुल भी तमीज़ नहीं है। तुम बिल्कुल पढ़े-लिखे नहीं हो, बेवकूफ़ हो, जाहिल हो।”

इस तरह की बातें सुनकर एसएओ और भी असमंजस में पड़ जाती हैं कि सामने वाला आखिर कहना क्या चाहता है। उधर से वह व्यक्ति कह रहा था कि आरबीआई की गाइडलाइनों के अनुसार इनके पैसे दिलवाइए और उन्हें जारी करवाइए।

जबकि एसएओ के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं होता कि यदि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया में किसी के पैसे फँसे हों, तो कोई इंस्पेक्टर उन्हें जारी करवा सके। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कशमकश चल रही थी और देखते ही देखते बातचीत बहस और कहासुनी में बदल जाती है।… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें