पुणे, महाराष्ट्र एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाली एक महिला इंजीनियर अपने ऑफिस में बैठी लगातार काम कर रही थी। उसे जो प्रोजेक्ट सौंपा गया था, उसकी डेडलाइन बहुत नज़दीक थी। उसकी छुट्टी का समय हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद वह ऑफिस से निकल नहीं रही थी।
तभी एक चपरासी भागता हुआ आया और बोला, “मैडम, आपकी बस आपका इंतज़ार कर रही है। कृपया जितनी जल्दी हो सके चलिए। करीब दो–तीन मिनट से बस खड़ी है और ड्राइवर लगातार हॉर्न बजा रहा है।”
महिला इंजीनियर ने कहा, “बस पाँच मिनट और दे दो। उसके बाद मैं तुरंत आ जाऊँगी। ड्राइवर से यही कह देना।”
चपरासी सीधे ड्राइवर के पास गया और बोला, “मैडम को अभी पाँच मिनट और लगेंगे, थोड़ा इंतज़ार कर लीजिए।”
ड्राइवर ने इंतज़ार किया, लेकिन पाँच मिनट कब दस और फिर पंद्रह मिनट में बदल गए, पता ही नहीं चला। ड्राइवर फिर से हॉर्न बजाने लगा।
चपरासी दोबारा मैडम के पास गया और बोला, “मैडम, अब बहुत हो गया है। आपको जाना चाहिए।”
मैडम ने फिर कहा, “बस दस मिनट और दे दो। मेरा काम लगभग पूरा होने वाला है।”
यह बात फिर से ड्राइवर तक पहुँचा दी गई। बस में बैठे बाकी इंजीनियरों ने शोर मचाना शुरू कर दिया— “सिर्फ एक व्यक्ति के लिए पूरी बस क्यों रोकी जाए?”
ड्राइवर पर लगातार दबाव बढ़ता गया। धीरे-धीरे आधे घंटे से भी ज़्यादा समय हो गया। काफ़ी इंतज़ार करने के बाद आखिरकार ड्राइवर बस लेकर चला गया।
कुछ देर बाद चपरासी फिर मैडम के पास आया और बोला, “मैडम, आपकी बस तो निकल चुकी है। अब जाने के लिए कोई साधन नहीं है। फैक्ट्री भी जंगल के इलाके में है, आप परेशान हो जाएँगी।”
लेकिन मैडम के दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी—उसे अपना प्रोजेक्ट पूरा करना था। वह उसी में लगी रही।
आख़िरकार वह अपनी तय समय से करीब 45 मिनट देर से ऑफिस से निकली। बाहर आकर देखा तो काफ़ी अंधेरा हो चुका था। वह बाहर खड़ी अपने पति को फोन करने लगी।
इसी दौरान एक कार आकर उसके पास रुकी। कार का शीशा थोड़ा नीचे हुआ और अंदर से आवाज़ आई, “दीदी, नमस्ते। आप ठीक हैं?”
महिला इंजीनियर ने जवाब दिया, “हाँ, मैं ठीक हूँ। तुम कैसे हो?”
तभी उस व्यक्ति ने कहा, “दीदी, अगर आपको ऐतराज़ न हो, तो क्या मैं आपको अपनी कार से छोड़ दूँ?”
महिला इंजीनियर ने थोड़ी सोचकर कहा, “हाँ, मैं तुम्हारे साथ चलने को तैयार हूँ।”… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें…