काठमांडू, नेपाल नेपाल की सरकार ने 26 ऐसे प्लेटफार्म चाहे YouTube हो, Facebook हो, Instagram हो, X हो, पर बैन लगा दिया और जैसे ही बैन लगता है उसके बाद फिर युवा सड़कों पर उतर आते हैं और विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर देते हैं। विरोध प्रदर्शन कुछ इस कदर था कि 1997 से लेके साल 2012 के बीच में पैदा हुए ऐसे युवा सड़कों पर उतर आते हैं जिनकी संख्या लाखों के हिसाब से होती है। वो संसद भवन की तरफ रुख कर रहे थे और इसी बीच में उन्हें रोकने की कोशिश की जा रही थी। एक डीएसपी ने आदेश किया और लगातार गोलियां चलना शुरू हो जाती हैं।
19 की मौके पर ही हत्या कर दी जाती है। उसके बाद इतना गुस्सा बढ़ जाता है कि पूरे नेपाल भर में प्रदर्शन होना शुरू हो जाते है। अब चाहे वो नेताओं, मंत्रियों के घर हो, आवास हो उन्हें ढूंढा जाता है। उनके घरों को ढूंढा जाता है। उनके जो बिजनेस व्यापार थे उनको भी ढूंढा जाता है। क्योंकि पिछले 6- सात दिन से लगातार उनके बिजनेस व्यापार के बारे में एक तरह से रिसर्च कर लिया गया था और छोटी-छोटी जानकारी कि किसका बिजनेस, किसका व्यापार, किसका स्कूल, किसका है होटल, किसका सब सामान कहां पर है। निशाना बनाया जाता है। उनको ही खत्म कर दिया जाता है और खत्म करने के पीछे वजह यह थी कि 20% आबादी जिस देश की, उनके पास तो सब कुछ है। उनके बच्चे दुनिया में घूम रहे हैं, विदेशों में घूम रहे हैं। उनके पास महंगी गाड़ियां हैं। लेकिन 80% आबादी के पास कुछ भी नहीं है। और उनके साथ बिल्कुल छल किया जा रहा है। उनको लगातार धोखा दिया जा रहा है।
हिंसा बढ़ने लगती है और हिंसा बढ़ते-बढ़ते लगभग 34 लोगों की मौत हो जाती है और 1300 के आसपास लगभग घायल हो जाते हैं और 1500 कैदी ऐसे होते हैं जो जेल तोड़कर इधर-उधर भाग जाते हैं। हालांकि सेना ने इसमें कुछ हिम्मत दिखाने की कोशिश की, कर्फ्यू लगाए, लोगों को रोकने की कोशिश की और जो जनरेशन थी, जो युवा थे वो सड़कों पर उतर ही रहे थे। उनको समझाने की कोशिश की। इसके बाद फिर वो सही ट्रैक पर चलने लगते हैं। कौन होगा नेपाल का प्रधानमंत्री? अभी इस पर विचार विमर्श चल रहा है और इसको लेकर सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म हो या फिर प्रिंट मीडिया हो, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो पूरी दुनिया भर में इसी बात को लेकर चर्चा चल रही है।… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें