लुधियाना, पंजाब करीब 7 महीने बाद दो दोस्तों की आपस में मुलाकात होती है। जब मुलाकात होती है, तो दोनों फैसला करते हैं कि चलो बैठते हैं और पार्टी करते हैं। जो दोस्त बाहर से आया होता है, वही दोस्त दूसरे को अपने घर ले जाता है और पार्टी शुरू हो जाती है।
समय दोपहर के लगभग 2:00 बजे का होता है। उस समय उसकी पत्नी बाहर काम पर गई हुई होती है और बच्चे छत पर आराम से खेल रहे होते हैं। दोनों दोस्त आमने-सामने बैठते हैं और बैठते ही शराब शुरू हो जाती है। एक के बाद एक पैग बनाए जा रहे होते हैं और दोनों एक-दूसरे को पिला रहे होते हैं। इसी बीच वे अपनी-अपनी बातें करने लगते हैं।
अभी बातचीत का सिलसिला शुरू ही हुआ होता है कि बाहर से आया हुआ दोस्त कहता है, “भाई, मेरे पैसे कब दोगे?”
बात जैसे ही पैसों पर आती है, उसी समय जिस घर में पार्टी हो रही होती है, उस दोस्त को बहुत गुस्सा आ जाता है। वह कहता है, “मैं पिछले 7 महीने से तुझे कितना मिस कर रहा था, कितना याद किया। तुझे वो बातें याद नहीं रहीं, तूने एक बार भी नहीं पूछा। लेकिन तूने यह जरूर पूछ लिया कि पैसे कब दूँगा? पैसों की इतनी भी क्या जरूरत है?”
वह आगे कहता है, “मेरे पास पैसे हैं, मैं तुझे पैसे दे दूँगा। लेकिन इस तरह पूछने की क्या जरूरत थी?”
यहीं से दोनों की बातचीत में कड़वाहट आ जाती है और धीरे-धीरे मनमुटाव की स्थिति पैदा हो जाती है। शराब पीते-पीते जिस दोस्त के घर में पार्टी हो रही होती है, उसे इतना गुस्सा आ जाता है कि वह अपने दोस्त को धक्का दे देता है।
जैसे ही वह धक्का देता है, दोस्त जिस कुर्सी पर बैठा होता है, उसी कुर्सी सहित पीछे गिर जाता है। गिरने के बाद वह वहीं पड़ा रहता है। घर का मालिक यह सोचकर आराम से शराब पीता रहता है कि गिर गया है, कोई बात नहीं।
लगभग 15 मिनट बीत जाते हैं, लेकिन वह दोस्त उठता ही नहीं है। तब वह खड़ा होता है और कहता है, “चल ठीक है, ये रहे तेरे पैसे। मैं दे दूँगा। इतनी भी क्या जल्दी थी? इतनी भी क्या नाराज़गी कि तू उठने को तैयार ही नहीं है?”
वह उसका हाथ पकड़ता है और उठाने की कोशिश करता है, लेकिन जैसे ही हाथ छूटता है, हाथ एकदम ज़मीन पर गिर जाता है। उस पल उसे एहसास होता है कि उसका दोस्त बेदम हो चुका है। उसके शरीर में कोई जान नहीं बची होती।
वह घबरा जाता है। समझ नहीं पाता कि क्या हुआ। तुरंत उसकी नब्ज़ टटोलता है, लेकिन नब्ज़ नहीं चल रही होती। वह उसकी साँसें भी चेक करता है—साँसें भी बंद हो चुकी होती हैं। उसका दोस्त लगभग 15 मिनट पहले ही मर चुका होता है।
वह सोच नहीं पा रहा होता, समझ नहीं पा रहा होता कि अब क्या करे। उसने तो कुछ किया भी नहीं था। ऐसा लग रहा होता है कि शायद कहानी यहीं खत्म हो जाएगी।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। यहीं से कहानी की असली शुरुआत होती है।
यह घटना इतना भयानक मोड़ लेती है कि किसी ने कल्पना भी नहीं की होती। साल 2026 में यह घटना उस प्रदेश की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक बन जाती है। जब इस घटनाक्रम का खुलासा होता है, तो लोगों को यकीन नहीं होता कि बिना किसी ठोस वजह के इतना खौफनाक कत्ल हो सकता है।… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें