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Crime

चार दोस्त और एक चंदे की कार

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हाथरस / अलीगढ
करीब 25 साल पुरानी यह बात है। उत्तर प्रदेश पुलिस में आईजी के पद पर तैनात एक आईपीएस ऑफिसर के बेटे ने अपने पिता से कहा कि मुझे एक बाइक खरीदनी है। जैसे ही पिता ने यह बात सुनी उन्होंने कहा कि ठीक है हम बाइक नहीं लेते बल्कि हम एक कार ले लेते हैं। पिता ने जैसे कहा था अपने वादे को पूरा कर दिया। लेकिन शर्त यह रखी गई थी कि जब भी या तो पिता बैठे या मां बैठे या फिर कोई साथ में पुलिस वाला बैठे तभी कार चलाने की अनुमति मिल जाती थी। इसके अलावा बिल्कुल भी नहीं मिलती थी। इसी बीच में आईजी साहब के पास एक आदेश आता है कि तुम्हें विदेश में ट्रेनिंग लेने के लिए जाना है। अब जब ट्रेनिंग लेने के लिए जाना था तो उन्होंने सोचा कि मैं अपनी पत्नी को भी साथ ले जाता हूं।

लेकिन घर पर बेटा अकेला रहेगा और वो स्कूल भी जाएगा। साथ ही एक ऑफिसर की घर पर ड्यूटी लगा दी गई थी ताकि उस लड़के पर ध्यान रखा जा सके। जब वो विदेश जा रहे थे तो विदेश जाने से पहले उस कार को गैरेज में खड़ी कर देते हैं और जो कार की चाबी होती है वह जाकर लॉकर में रख देते हैं। साथ ही जो गैरेज था उसकी भी चाबी लॉकर में छुपा कर रख देते हैं ताकि बेटे की इस पर नजर ना पड़े। यहां से वह विदेश गए ही थे कि उनके पास एक खबर पहुंचती है कि लड़का दरअसल एक चाबी बनाने वाले को घर पर लेके आता है और चाबी बनाने वाले को जब घर पे लाता है तो उससे गैराज की चाबी बनवा लेता है।

हालांकि पुलिस वाले ने रोकने की कोशिश की लेकिन वो ठहरा आईजी साहब का बेटा इसलिए ज्यादा विरोध कर नहीं पाया। इसके बाद फिर पहले गैराज की चाबी बनवाई जाती है। फिर जो कार की चाबी थी वह बनवाई जाती है। अब उसने अपने दोस्तों को फोन किया और दोस्तों को फोन करने के बाद कहा कि चलो घूमने के लिए चलते हैं। अब दोस्तों के साथ घूमने के लिए गए थे, पार्टी करने के लिए गए थे। वो चले तो जाते हैं जब वापस लौट कर आ रहे थे तो रास्ते में कार का एक्सीडेंट हो जाता है और आईजी साहब का जो बेटा था वो ऑन द स्पॉट खत्म हो जाता है।… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें