करीब 20 साल का एक लड़का था, जो बीबीए की पढ़ाई कर रहा था। पढ़ाई के साथ-साथ उसे सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर रील्स देखने का बहुत ज्यादा शौक था।
एक दिन वह Instagram पर रील्स देख रहा था। रील देखते-देखते अचानक उसकी नजर एक ऐसी जानकारी पर रुक गई, जिसे देखकर वह खुद भी हैरान रह गया।
जानकारी में बताया गया था कि मानव अंग यानी टेस्टिकल, जिसे हम हिंदी में अंडकोष कहते हैं, यदि किसी एक इंसान का एक अंडकोष बाजार में बेचा जाए तो उसकी कीमत करीब 6 करोड़ रुपये के आसपास होती है।
20 साल के उस लड़के ने यह जानकारी देखी तो वह हैरान रह गया। इसके बाद उसके दिमाग में एक ख्याल आया कि अगर कहीं से अंडकोष मिल जाए तो वे करोड़पति बन सकते हैं।
उसने अपने ही मोहल्ले के पास रहने वाले एक लड़के से बातचीत की। बातचीत के दौरान उसने कहा, “देख दोस्त, मैंने इस तरह की एक रील देखी है। अगर हमें एक टेस्टिकल मिल जाए तो हम एक से 6 करोड़ रुपये कमा सकते हैं और दो मिल जाएं तो 12 करोड़ रुपये कमा सकते हैं। अब क्या करना चाहिए?”
उस लड़के ने कहा, “यह कौन-सी बड़ी बात है? मैं थोड़ी ही देर में या कुछ ही दिनों में इसका इंतजाम कर दूंगा।”
हालांकि, उसने यह भी बताया कि इसके लिए व्यक्ति की उम्र ज्यादा नहीं होनी चाहिए। उसकी उम्र 15-16 साल के आसपास होनी चाहिए, यानी 18 साल से कम होनी चाहिए। तभी उसकी कीमत मिलेगी, वरना कीमत नहीं मिलेगी।
जब इस तरह की बात सामने आती है, तो अंडकोष के इंतजाम में करीब एक महीने का समय लग जाता है।
आखिरकार टेस्टिकल का इंतजाम हो जाता है। वह भी एक इंसान के दोनों टेस्टिकल थे, यानी दोनों अंडकोष।
अब दोनों दोस्त उन अंडकोषों को लेकर बाजार में निकल जाते हैं। कभी इस अस्पताल तो कभी उस अस्पताल, वे उन्हें बेचने की लगातार कोशिश करते रहे। लेकिन तीन दिन तक लगातार कोशिश करने के बावजूद वे नाकाम रहे। यानी बाजार में उन्हें कोई खरीदार मिल ही नहीं रहा था।
जिस लड़के ने अंडकोषों का इंतजाम किया था, उसने आखिरकार पूछा, “तुमने यह जानकारी कहां से प्राप्त की थी? क्या बात है?”
उसने कहा, “मैंने WhatsApp से जानकारी प्राप्त की थी। मुझे वहीं से यह पता चला था।”
तभी दूसरा लड़का कहता है, “एक बार फिर से जानकारी जुटाने की कोशिश करो। हो सकता है कि कुछ नई जानकारी मिल जाए।”
जब नई जानकारी जुटाने की बात आती है, तो वह लड़का थोड़ा गहराई से पढ़ने की कोशिश करता है। तब पता चलता है कि यह जून 2017 की बात थी। अमेरिका से एक खबर चलती है और अमेरिका से होते हुए जब यह खबर भारत पहुंचती है, तो इस खबर का अर्थ का अनर्थ हो जाता है।
यानी ऐसी कोई बात ही नहीं थी। मानव अंगों की इस तरह कोई बिक्री नहीं हो सकती थी। अगर ऐसा संभव होता तो न जाने कितने लोग करोड़पति बन जाते।
अब उसने उन अंडकोषों को तो फेंक दिया, लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती। कहानी तो यहीं से शुरू होती है।
आखिर वे टेस्टिकल किसके थे? उन्हें कहां से लाया गया था? यही सबसे बड़ा सवाल था।
और जब इस सवाल का जवाब लोगों के सामने आता है, तो लोग हैरान रह जाते हैं। आश्चर्य होता है कि आखिर इस पूरी कहानी में क्या हुआ था?
आज की इस कहानी के माध्यम से जानने और समझने की कोशिश करते हैं।
यह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की सच्ची घटना है।
भोपाल में एक थाना है, श्यामला हिल्स पुलिस स्टेशन। इसी थाना क्षेत्र में छोटे तालाब के पास एक धोबी घाट है और धोबी घाट के पास एक प्रेम मंदिर है।
प्रेम मंदिर के पास लोगों को तालाब में एक लाश तैरती हुई दिखाई देती है। लोगों की नजर जैसे ही उस लाश पर पड़ती है, वे तुरंत पुलिस को 112 नंबर पर सूचना देते हैं।
तारीख 10 अगस्त 2026 थी और शाम का वक्त था।
जैसे ही पुलिस को सूचना मिलती है, पुलिस मौके पर पहुंचती है। इसके बाद गोताखोरों को बुलाया जाता है। गोताखोरों की मदद से उस लाश को तालाब से बाहर निकलवाया जाता है।
लाश को बाहर निकालने के बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया जाता है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि शरीर पर एक के बाद एक कई धारदार हथियारों के वार किए गए थे।…पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें