जयपुर, राजस्थान एक लड़की की दो-तीन दिन बाद बारात आने वाली थी। बारात आने के बाद वह दुल्हन बनकर विदा होने वाली थी। अचानक उसकी मुलाकात अपने प्रेमी से हो जाती है।
करीब पाँच-छह साल से उनकी दोस्ती थी, प्यार था। दोनों एक-दूसरे के साथ जीने-मरने की कसमें खा चुके थे। दुल्हन ने भी काफी कोशिश की और उसके प्रेमी ने भी काफी कोशिश की कि दोनों शादी कर लें। दोनों एक ही समाज और एक ही बिरादरी के थे। सब कुछ एक जैसा था, लेकिन परिवार वाले शादी के लिए तैयार नहीं थे।
अब जब दुल्हन बनकर विदा होने वाली थी, तब उसकी अपने प्रेमी से मुलाकात होती है। प्रेमी उससे कहता है, “तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगी?”
प्रेमिका कहती है, “मैं तुम्हें कभी नहीं भूल सकती। तुम जब चाहोगे, जैसे चाहोगे, मैं वैसे ही तुमसे मिलने के लिए आ जाऊंगी। यह रिश्ता जैसे शादी से पहले था, शादी के बाद भी वैसे ही मजबूत और प्रगाढ़ रहेगा। जैसा वादा किया गया है, ठीक वैसा ही होगा।”
ठीक वैसा ही होता है। दुल्हन बनती है, विदा होती है और अपने ससुराल चली जाती है। वहां वह करीब एक सप्ताह तक अपने पति के साथ रहती है।
एक सप्ताह बाद वह अपने पति से बड़े प्यार और सलीके से कहती है, “देखो, मुझे अपने मायके और परिवार की बहुत याद आ रही है। क्या तुम मुझे मेरे घर छोड़ दोगे?”
पति कहता है, “कोई दिक्कत नहीं है। वैसे भी तुम अपने मायके से आई हो, तो जाहिर सी बात है कि तुम्हें अपने परिवार की याद तो आएगी ही।”
दुल्हन अपने पति के साथ सीधे मायके पहुंच जाती है। लेकिन मायके में उसे सिर्फ अपने परिवार से नहीं मिलना था, बल्कि उसे अपने प्रेमी से भी मिलना था। प्रेमी से उसने जो वादा किया था, उसे निभाना था।
उसका प्रेमी मायके के पास ही रहता था। जब चाहती, जैसे चाहती, उससे मुलाकात हो जाती थी। लेकिन किसी को इस बात का एहसास तक नहीं था।
समय धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। एक महीना, दो महीने, तीन महीने… जैसे-जैसे वक्त गुजरता गया, प्रेमी के इशारे पर प्रेमिका उससे मिलने की कोशिश करती रही।
शुरुआत में तो प्यार से काम चल जाया करता था, लेकिन जब वक्त आगे बढ़ा तो प्यार की जगह तकरार ने ले ली। अब जब उसे मायके जाना होता, तो वह कोई न कोई बहाना बनाती। पति-पत्नी के बीच ऐसा झगड़ा खड़ा कर देती कि उसे मायके जाने का मौका मिल जाए।
मायके आने के बाद वह आराम से अपने प्रेमी से मिलती। उससे मिलकर उसका दिल भर जाता और फिर वह वापस ससुराल आ जाती।
ऐसा करते-करते दो साल का समय बीत गया। जिस तरह वह अपने पति से मिलती थी, उसी तरह अपने प्रेमी से भी मुलाकात करती रही।
अब प्रेमी और प्रेमिका ने सोचा कि क्यों न इस पति को ही रास्ते से हटा दिया जाए?
इसके लिए दोनों ने बड़ी तगड़ी प्लानिंग की। पूरी योजना बनाने के बाद पति की हत्या कर दी जाती है।
हत्या के दस दिन तक किसी को इस बात का एहसास तक नहीं हुआ। दरअसल, यह एक मर्डर था। लोग इसे सामान्य मौत समझ रहे थे, लेकिन यह सामान्य मौत नहीं थी।
फिर दुल्हन से एक सवाल पूछा जाता है और वह उस सवाल का जो जवाब देती है, उसी जवाब में कत्ल का राज छिपा हुआ था।
आखिर कैसे इस घटनाक्रम का खुलासा होता है? कैसे उस पति की हत्या की जाती है? आज की इस कहानी के माध्यम से जानने और समझने की कोशिश करते हैं।
तारीख है 5 अगस्त 2026। शाम के लगभग 3:30 बजे का वक्त हो रहा था।
कविता मीणा नाम की एक महिला अपने देवर, जिसका नाम मनीष है, को फोन लगाती है। फोन करने के बाद वह कहती है, “देवर जी, आप एक काम करो। श्याम नगर इलाके में 200 फीट चौराहे के पास पहुंच जाओ। तुम्हारे भैया की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई है।”
जैसे ही मनीष ने यह बात सुनी, उसने कहा, “भाभी, आप चिंता मत करो… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें