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आगरा मर्डर केस: 44 दिनों तक लाश के ऊपर चलता रहा परिवार

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सिकंदरा, आगरा

लगभग 80 वर्ष की एक बुजुर्ग महिला थीं, जिन्हें आँखों से बहुत कम दिखाई देता था। उनकी तकलीफ तब और बढ़ जाती थी जब उन्हें बाथरूम जाना होता था। बाथरूम में बनी इंडियन टॉयलेट सीट लगभग दो फीट ऊँची थी। इसी वजह से वह बुजुर्ग महिला दीवार का सहारा लेकर धीरे-धीरे जैसे-तैसे वहाँ तक पहुँचती थीं। लेकिन ऊँचाई अधिक होने के कारण बैठते समय वह कई बार संतुलन खोकर गिर जाती थीं। जब भी वह गिरतीं, तो आवाज लगाकर अपनी पोती या अपनी बहू को बुलाती थीं और कहती थीं, “बेटा, मैं गिर गई हूँ, मुझे यहाँ से उठाकर ले जाओ।”

यह उनकी रोज की परेशानी बन चुकी थी। एक दिन उन्होंने अपनी बहू से कहा, “बेटा, मैं बाथरूम में बार-बार गिर जाती हूँ, मुझे बहुत तकलीफ होती है। तुम इस बाथरूम के फर्श को समतल (प्लेन) क्यों नहीं करवा देती?” बहू जैसे इसी मौके के इंतजार में थी। उसने तुरंत कहा, “ठीक है माँ जी, मैं इसे जल्द ही ठीक करवा देती हूँ।”

आखिरकार वह दिन भी आ गया। एक मजदूर को 400 रुपये दिए गए और मिट्टी मंगवाकर फर्श को समतल कराया गया। इसके बाद एक राजमिस्त्री का इंतजाम किया गया। कंक्रीट, सीमेंट और बदरपुर (रेत) जैसी सभी निर्माण सामग्रियों की व्यवस्था करने के बाद मिस्त्री को निर्देश दिया गया, “बाथरूम के फर्श को बिल्कुल समतल कर दो, लेकिन इस बात का ध्यान रखना कि नहाते समय पानी टॉयलेट सीट की तरफ न जाए।”

बहू ने जैसी तरकीब बताई थी, मिस्त्री ने बिल्कुल वैसा ही काम कर दिया। इसके बाद जब भी सासू माँ बाथरूम जाती थीं, तो उन्हें कोई परेशानी नहीं होती थी। एक दिन उन्होंने खुश होकर अपनी बहू को पुचकारते हुए कहा, “बहू, तुम तो बिल्कुल बेटे की तरह मेरा ख्याल रखती हो। मेरा बेटा तो ऐसा नालायक है जो मेरी सुनता ही नहीं, लेकिन तुम वाकई बहुत अच्छी हो।”

अब उस बाथरूम का इस्तेमाल वह बुजुर्ग महिला और परिवार के अन्य सभी सदस्य बिना किसी परेशानी के कर रहे थे। लेकिन कोई यह नहीं जानता था कि जिस फर्श को इतनी शिद्दत से समतल कराया गया था, उसी के ठीक नीचे एक इंसान की लाश दफन थी। लाश को दफनाने के बाद किसी को कानों-कान खबर नहीं हुई और सब अनजाने में उस बाथरूम का इस्तेमाल करते रहे। लेकिन जब एक दिन वह लाश फर्श के नीचे से निकलकर बाहर आई, तो न केवल उस परिवार के बल्कि सोशल मीडिया और अखबारों के माध्यम से देश भर के लोगों के होश उड़ गए। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इस कत्ल के पीछे कोई बहुत बड़ी वजह नहीं थी।

यह घटना 25 मई 2026 की सुबह लगभग 10:00 बजे की है। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के सिकंदरा थाने में रूबी शर्मा नाम की एक महिला अपने जेठ अनिल शर्मा के साथ पहुँचती है। वह थानेदार के सामने रोते हुए कहती है, “साहब, मेरे पति कई दिनों से लापता हैं। हमने उन्हें अपने सभी रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों के यहाँ ढूँढ लिया, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चल रहा। कृपया हमारी मदद कीजिए।” महिला ने पुलिस को अपने पति की तस्वीर भी दिखाई।

पुलिस ने मामले को सामान्य गुमशुदगी (Missing Report) की तरह लिया और रूबी से एक तहरीर (लिखित शिकायत) लिखवाकर एफआईआर दर्ज कर ली। शुरुआती दिनों में पुलिस ने इस मामले में कोई खास दिलचस्पी या सक्रियता नहीं दिखाई, जिससे जाँच आगे नहीं बढ़ सकी।

उधर, परिवार वाले लगातार परेशान थे। गायब व्यक्ति का नाम सुरेंद्र शर्मा था, जिनकी उम्र लगभग 44 वर्ष थी। परिजनों के अनुसार, सुरेंद्र 19 मई 2026 की सुबह करीब 9 या 10 बजे से लापता थे। वह घर से 5,000 रुपये लेकर निकले थे और उन्हें शराब पीने की लत थी।

वक्त का पहिया घूमता रहा और देखते ही देखते 44 दिन बीत गए। इसी बीच सुरेंद्र शर्मा के बड़े भाई अनिल शर्मा अपनी बुजुर्ग माँ को लेकर राजस्थान के भरतपुर गए। वहाँ ‘बैंक ऑफ बड़ौदा’ की शाखा में जाकर उन्होंने माँ की पासबुक अपडेट कराई और बैंक कर्मियों से पूछा, “माँ की पेंशन पिछले कुछ समय से क्यों नहीं आ रही है?”

पासबुक चेक करने के बाद बैंक अधिकारियों ने कहा, “पेंशन तो हर महीने समय पर आ रही है और इसमें से नियमित रूप से पैसे भी निकाले जा रहे हैं। आपको शायद कोई गलतफहमी हुई है।”

यह सुनते ही अनिल शर्मा के होश उड़ गए और वह गहरी चिंता में डूब गए। दरअसल, माँ की पेंशन के पैसों का एक हिस्सा छोटा भाई (सुरेंद्र) रखता था और आधा हिस्सा बड़ा भाई (अनिल) रखता था। छोटा भाई पिछले 44 दिनों से लापता था, फिर पेंशन के पैसे कौन निकाल रहा था? बड़े भाई को जब अपनी हिस्से की पेंशन नहीं मिली, तो वह सच जानने के लिए बेचैन हो उठा।

तारीख 2 जुलाई 2026, शाम के करीब 6 से 7 बजे का वक्त था। अनिल शर्मा सीधे अपने छोटे भाई की पत्नी रूबी शर्मा के पास पहुँचे। उन्होंने रूबी से कहा, “मुझे तुमसे सिर्फ दो सवाल पूछने हैं, बस पूरी ईमानदारी से उनका सही-सही जवाब दे देना।”

यह सुनते ही रूबी के चेहरे का रंग उड़ गया और वह बिल्कुल खामोश हो गई। अनिल ने पहला सवाल किया, “माँ की जो पेंशन बैंक से निकाली जा रही है, वह पैसे कहाँ जा रहे हैं?” और दूसरा सवाल, “मेरा भाई सुरेंद्र इतने दिनों से कहाँ गायब है, उसके बारे में सच-सच बताओ।”

इन सवालों को सुनते ही रूबी शर्मा पत्थर बन गई। उसके मुँह से एक शब्द भी नहीं निकला। अनिल काफी देर तक जवाब का इंतजार करते रहे, लेकिन अपने छोटे भाई की पत्नी होने के नाते उन्होंने मर्यादा नहीं लांघी और बिना ऊँची आवाज में बात किए चुपचाप अपने घर लौट गए।

अनिल के जाने के बाद, रूबी अपने घर में अकेली थी और उसके दिमाग में इस पूरी खौफनाक साजिश की कहानी फिर से घूमने लगी। इस खौफनाक कहानी के तार जुड़े थे राजस्थान के भरतपुर के रंजीत नगर से, जहाँ का रहने वाला एक व्यक्ति जिसका नाम… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें

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