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Crime

मेरठ अग्निकांड का सबसे बड़ा रहस्य: 16 साल बाद खुला सच

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मेरठ / बुलंदशहर
10 अप्रैल 2006 की शाम लगभग 5:30 बजे का समय था। उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में स्थित विक्टोरिया पार्क में एक बड़ा मेला आयोजित किया गया था। मेले में तीन विशाल पंडाल बनाए गए थे, जिनमें एक समय में लगभग 2,000 से 3,000 लोगों के बैठने और आने-जाने की क्षमता थी।

यह तीन दिवसीय मेला था, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक सामानों की प्रदर्शनी लगाई गई थी। शहर के प्रतिष्ठित लोग, व्यापारी, उद्योगपति और आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोग इस प्रदर्शनी को देखने के लिए आ रहे थे।

इसी दौरान, 10 अप्रैल 2006 की शाम करीब 5:30 बजे अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया। शॉर्ट सर्किट के कारण पंडाल में आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि मात्र पांच मिनट के भीतर तीनों बड़े पंडाल उसकी चपेट में आ गए।

उस समय लगभग 2,000 लोग पंडालों के अंदर मौजूद थे। जैसे ही आग लगने की सूचना फैली, लोगों में अफरा-तफरी मच गई और वे अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि पंडाल में प्रवेश करने और बाहर निकलने का केवल एक ही रास्ता था।

परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोग मुख्य द्वार पर ही फंस गए। इस भयावह हादसे में 67 लोगों की मौत हो गई, जबकि लगभग 81 लोग गंभीर रूप से झुलस गए।

चारों ओर चीख-पुकार मची हुई थी। इस घटना की चर्चा पूरे देश में हुई। सबसे दुखद और हैरान करने वाली बात यह थी कि मृतकों में कई लोगों के शव इतनी बुरी तरह जल चुके थे कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो गया था। यह तक पता नहीं चल पा रहा था कि शव किसी पुरुष का है, महिला का है, बुजुर्ग का है या बच्चे का। कई शव पूरी तरह जलकर कोयले जैसे हो गए थे। आग ने इतना भयानक रूप धारण कर लिया था।

लेकिन इन्हीं 67 मृतकों के बीच एक ऐसा व्यक्ति भी था, जिसने इस हादसे का फायदा उठाकर खुद को मृत घोषित करा लिया। वह कहीं जाकर छिप गया और वर्षों तक किसी को उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।

समय बीतता गया और पूरे 16 साल गुजर गए। फिर एक दिन पता चला कि जिसे लोग मृत समझ रहे थे, वह वास्तव में जिंदा था। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। जब पुलिस ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया, तो लोगों को यकीन ही नहीं हुआ कि आखिर वह व्यक्ति 67 मृतकों के बीच अपनी पहचान कैसे छिपाने में सफल हो गया।

उत्तर प्रदेश में हापुड़ नाम का एक जिला है। इसी जिले में गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र स्थित है। यह घटना वर्ष 2019 की है।

गढ़मुक्तेश्वर के एक गांव में शादी का माहौल था। एक युवक की बारात जाने वाली थी और बारात से एक दिन पहले भात का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में दूल्हे के मामा, मौसा, मौसी, नाना तथा भात देने वाले परिवार के अन्य सदस्य शामिल हुए थे।

घर में खुशी का माहौल था। गीत-संगीत चल रहा था और सभी लोग उत्सव का आनंद ले रहे थे। इसी दौरान कई लोगों ने तस्वीरें खींचीं और उन्हें अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर साझा कर दिया।

जैसे ही ये तस्वीरें व्हाट्सएप स्टेटस पर डाली गईं, उनमें से एक तस्वीर मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र के मदारपुर गांव में रहने वाले एक व्यक्ति की नजर में आ गई।

उस व्यक्ति ने तस्वीर को बार-बार ज़ूम करके देखना शुरू किया। वह ध्यान से चेहरे की पहचान करने की कोशिश कर रहा था। कुछ देर बाद उसने अपने परिवार के लोगों से कहा,

“यह व्यक्ति मुझे कुछ जाना-पहचाना लग रहा है। ऐसा लग रहा है कि यह कोई और नहीं, बल्कि अनिराज है… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें