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Crime

1.25 करोड़ या जिंदगीभर की जेल?

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मुंबई/महाराष्ट्र

एक आदमी अपने घर में कई घंटों से बिल्कुल खामोश और परेशान बैठा था। उसके दिमाग में हजारों सवाल चल रहे थे। वह समझ नहीं पा रहा था कि आखिरकार क्या करे। इसी बीच उसके दिमाग में ख्याल आया कि क्यों न अपने चचेरे भाई से मदद मांगी जाए।

उसने अपने चचेरे भाई को फोन किया और कहा, “मैं बहुत ज्यादा परेशान हूं। मुझे तुम्हारी मदद की जरूरत है। तुम्हें शायद पता भी नहीं होगा कि इस वक्त मेरे पास लगभग 2 करोड़ 54 लाख रुपये हैं। तुम चाहो तो मुझसे कितने भी पैसे मांग सकते हो। बस तुम मेरा एक काम कर दो।”

यह सुनकर चचेरा भाई कहने लगा, “भैया, आप कैसी बातें कर रहे हैं? आप मुझसे मदद मांग रहे हैं या फिर मुझे पैसों का लालच दे रहे हैं?”

तुरंत ही बड़ा भाई बोला, “मेरी सोचने-समझने की शक्ति इस वक्त काम नहीं कर रही है। मेरा दिमाग बिल्कुल काम नहीं कर रहा। मुझे यह सोचने में कई घंटे लग गए कि तुमसे बात कैसे करूं। तुम ही मेरा आखिरी रास्ता हो। सिर्फ तुम ही मेरी मदद कर सकते हो।”

बड़े भाई की यह बात सुनकर छोटा भाई कहने लगा, “मुझे बताइए तो सही कि आखिर काम क्या है?”

बड़ा भाई बोला, “सबसे पहले मुझे भरोसा दिलाओ कि यह बात तुम किसी से नहीं कहोगे। और मुझे यह भी भरोसा दिलाओ कि मैं जो काम तुमसे कहूंगा, तुम उसे जरूर करोगे।”

छोटे भाई ने कहा, “मुझ पर तुम्हें बिल्कुल भी भरोसा नहीं है क्या? कैसी बातें कर रहे हो भैया! हम बचपन से साथ खेले हैं। हमारा सब कुछ साथ-साथ रहा है। क्या तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हारी बात नहीं मानूंगा?”

इसके बाद बड़े भाई ने कहा, “ठीक है, तो सुनो। मैंने एक मर्डर कर दिया है। एक कत्ल कर दिया है और अब मुझे उस लाश को छिपाना है।”

जैसे ही छोटे भाई ने यह बात सुनी, वह एकदम घबरा गया। परेशान होकर बोला, “भैया, कैसी बातें कर रहे हो? तुमने मर्डर कर दिया है?”

बड़ा भाई बोला, “हां भैया, मैंने मर्डर कर दिया है। अब मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि उस लाश को कैसे छिपाऊं। अगर मैं लिफ्ट से बाहर निकलकर जाऊंगा तो वहां भी सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। अगर लॉबी से होकर जाऊंगा तो वहां भी सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। अब बस तुम ही मेरा आखिरी रास्ता हो। तुम ही मेरी मदद कर सकते हो।”

यह सुनकर चचेरे भाई ने कहा, “चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। मुझे थोड़ा वक्त दो। थोड़ा सोचने तो दो कि मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं, क्योंकि मामला बहुत बड़ा है।”

उसके भाई ने कहा, “ठीक है, तुम सोच लो और मेरी मदद करने के लिए जल्द से जल्द यहां आ जाओ।”

जब छोटे भाई ने पूरी बात सुनी तो उसके दिमाग में अब करोड़ों रुपये घूमने लगे थे। वह सोचने लगा कि अगर दोनों 50-50 कर लेते हैं तो वह भी लगभग 1 करोड़ 25 लाख रुपये का मालिक बन सकता है।

लेकिन अगले ही पल उसके दिमाग में दूसरा सवाल आया कि अगर वे पकड़े गए तो क्या होगा? ऐसा भी हो सकता है कि उन्हें सलाखों के पीछे जाना पड़े और पूरी जिंदगी जेल में गुजारनी पड़े।

इसके अलावा उसके मन में यह सवाल भी उठ रहा था कि आखिर भैया ने किसका मर्डर किया है? क्यों किया है? क्या वजह रही होगी? उसके दिमाग में हजारों सवाल चल रहे थे और वह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर क्या करे।

कुछ देर बाद वह अपने भाई के पास जाने के लिए घर से निकल पड़ा। लेकिन रास्ते में उसे एक पुलिस स्टेशन दिखाई दिया। पुलिस स्टेशन देखते ही उसने अपने भाई के पास जाने के बजाय सीधे पुलिस स्टेशन जाने का फैसला किया।

वहां पहुंचकर वह करीब 10-15 मिनट तक खड़ा सोचता रहा कि आखिर क्या करे और क्या न करे। भाई के पास जाए या पुलिस को पूरी बात बता दे। इसी उधेड़बुन के बीच आखिरकार उसके कदम भाई के घर की तरफ नहीं, बल्कि सीधे देवघर पुलिस स्टेशन की तरफ बढ़ गए।

वहां पहुंचकर उसने एसएचओ के सामने अब तक हुई पूरी घटना की जानकारी दे दी।

शुरुआत में एसएचओ को लगा कि शायद वह मजाक कर रहा है, लेकिन उसकी बातें सच थीं।

आगे जो हुआ, वह बेहद भयानक और खौफनाक था। अगर यह भाई पैसों के लालच में आ जाता तो शायद कभी भी कातिल को सजा नहीं मिल पाती। न यह बात कभी आप तक पहुंचती और न ही आज मैं आपको यह कहानी सुना रहा होता। देश के अलग-अलग हिस्सों का मीडिया भी शायद इस घटना पर चर्चा नहीं कर रहा होता।

आदाब, नमस्कार और सत श्री अकाल। मैं हूं उस्मान सैफी।

कहानी की शुरुआत होती है साल 2010 से। यह घटना महाराष्ट्र के मुंबई शहर की है।

एक कपड़ों के शोरूम में गिरीश खोटे नाम का एक व्यक्ति सेल्स मैनेजर के पद पर काम करता था। उसका शोरूम एक मॉल के अंदर बना हुआ था।

एक दिन वह अपने काम में व्यस्त था। इसी दौरान अचानक वह शोरूम से बाहर निकला तो उसकी नजर सामने से गुजर रही एक लड़की पर पड़ी। वह लड़की को तब तक देखता रहा, जब तक वह उसकी आंखों से ओझल नहीं हो गई। लड़की के वहां से चले जाने के बाद वह दोबारा अपने काम में जुट गया।

दो-चार दिन बीत गए। एक दिन फिर वही लड़की उसे दिखाई दी। इस बार भी वह उसे बड़े गौर से देख रहा था। तभी अचानक उस लड़की की नजर भी उस पर पड़ गई।

जैसे ही दोनों की नजरें मिलीं, गिरीश ने चुपचाप अपनी नजरें हटा लीं और वापस अपने शोरूम में जाकर बैठ गया।

वह सेल्स मैनेजर था और शोरूम में जेंट्स के कपड़े मिलते थे। इसी बीच वह लड़की घूमते-घूमते उसके शोरूम में आ गई। उसने इधर-उधर कपड़े देखे और फिर वहां से चली गई।

लेकिन जब तीसरी बार गिरीश ने उसी लड़की को मॉल में देखा तो इस बार दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई। दोनों ने एक-दूसरे को हाय-हेलो कहा।

बातचीत के दौरान सबसे पहले गिरीश ने लड़की से कहा, “तुम तो बिल्कुल अंग्रेज जैसी लगती हो। इतनी खूबसूरत हो और तुम्हारा रंग इतना साफ है कि देखने में बिल्कुल अंग्रेज लगती हो।”

यह सुनकर लड़की जोर-जोर से हंसने लगी। लेकिन जब उसने बोलना शुरू किया तो गिरीश को पता चला कि वह सचमुच एक अंग्रेज लड़की थी।… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें