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उन्नाव मर्डर केस: बेटी के घर जा रही थी माँ, रास्ते में छूट गया बक्सा… अंदर मिली लाश!

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उन्नाओ / उत्तर प्रदेश
करीब 42 साल की एक महिला अपनी बेटी को फोन करती है। फोन लगाने के बाद वह बिल्कुल कुछ नहीं कहती, बस खामोश रहती है और रोती रहती है। जब उसकी सिसकियों की आवाज बेटी तक पहुँचती है, तो वह अपनी माँ से पूछती है, “माँ, क्या हुआ? तुम क्यों परेशान हो? क्या कोई दिक्कत आ गई है?”

इसी बीच माँ अपनी बेटी से पूछती है, “बेटा, अगर तुम्हें कोई दिक्कत न हो और कोई ऐतराज न हो, तो क्या मैं तुम्हारे साथ रह सकती हूँ? सिर्फ कुछ दिनों के लिए मुझे अपने पास रहने की इजाजत दे दो।”

माँ ने जब रोते हुए और गिड़गिड़ाते हुए अपनी बेटी से रहने की इजाजत माँगी, तो बेटी के मन में अपनी माँ के प्रति पुरानी नाराजगी फिर से उभर आई।

दरअसल, जब बेटी की शादी हुई थी, तो शादी के बाद उसके चार बेटियाँ हुईं। लेकिन कुछ समय बाद वह अपने पति से अलग हो गई। पति तीन बेटियों को अपने साथ ले गया, जबकि एक बेटी को लेकर माँ अलग रहने लगी।

माँ और बेटी साथ-साथ रह रही थीं। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। लेकिन इसी बीच माँ की जिंदगी में एक लड़का आया, जो उम्र में उससे लगभग 17 साल छोटा था। माँ को उससे प्यार हो गया। धीरे-धीरे दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे और बाद में उन्होंने शादी भी कर ली।

माँ का यह फैसला बेटी को बिल्कुल पसंद नहीं आया। इसी वजह से उसने अपनी माँ का साथ छोड़ दिया और उससे दूर रहने लगी। वह मेहनत-मजदूरी करके अपना गुजारा करती थी, लेकिन अपनी माँ से दूर रही। माँ के इस फैसले को लेकर उसके मन में नाराजगी बनी हुई थी।

जब बेटी ने अपनी माँ की परेशानी सुनी, तो उसने कहा, “ठीक है, तुम मेरे साथ रह सकती हो, लेकिन उस व्यक्ति को मेरे घर लाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं उस इंसान से कितनी नफरत करती हूँ।”

माँ ने बेटी की बात सुनकर कहा, “ठीक है, मैं अकेली ही आऊँगी। क्या मैं अपना सामान लेकर आ सकती हूँ?”

बेटी ने जवाब दिया, “ठीक है, कोई दिक्कत नहीं है। तुम अपना सामान लेकर आ सकती हो, लेकिन ध्यान रखना कि वह इंसान मेरे आसपास भी दिखाई नहीं देना चाहिए।”

बेटी की इजाजत मिलने के बाद माँ ने अपना सारा सामान समेटा और बेटी के घर जाने के लिए निकल पड़ी। लेकिन रास्ते में उसका एक बक्सा छूट गया।

जब उस बक्से के बारे में पता चला और उसे खोला गया, तो उसके अंदर एक लाश मिली। शव की हालत बेहद भयावह थी। किसी की बेरहमी से हत्या की गई थी और उसे बक्से में बंद करके छोड़ दिया गया था।

जैसे-जैसे इस हत्याकांड की खबर चारों तरफ फैलने लगी और घटना का खुलासा हुआ, लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

20 अक्टूबर 2026 की रात करीब 10 बजे का वक्त था। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में ललऊ खेड़ा नाम की एक पुलिस चौकी है। इस पुलिस चौकी से लगभग 350 मीटर की दूरी पर उन्नाव-लालगंज मार्ग पर, जो कि नेशनल हाईवे-31 (NH-31) बताया जा रहा है, एक निजी अस्पताल स्थित है।

अस्पताल के ठीक सामने लोहे का एक बड़ा-सा बक्सा लावारिस हालत में सड़क किनारे पड़ा हुआ था। बक्से की लंबाई लगभग चार फुट और ऊँचाई करीब तीन फुट थी।

इसी रास्ते से गुजर रहे एक व्यक्ति की नजर उस बक्से पर पड़ी। उसे देखकर वह रुक गया और इधर-उधर देखने लगा। उसने करीब 10 से 15 मिनट तक यह जानने की कोशिश की कि बक्से का कोई मालिक है या फिर उसे यूँ ही छोड़ दिया गया है।

वह वहीं रुककर इंतजार करता रहा। इसी दौरान अस्पताल के सामने से गुजर रहे कुछ अन्य लोगों और अपने मरीजों की देखभाल के लिए अस्पताल आए तीमारदारों की नजर भी उस बक्से पर पड़ गई।

देखते ही देखते वहाँ तीन-चार लोग इकट्ठा हो गए। अब सभी के मन में एक ही सवाल था—आखिर इस बक्से के अंदर क्या है और इसे यहाँ कौन छोड़कर गया है?… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें

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