आगरा, उत्तर प्रदेश 19 फरवरी 2026 की यह बात है। एक दुल्हन जब अपने मायके से विदा होकर ससुराल पहुँचती है, तो उसका धूमधाम से स्वागत किया जाता है। घर की महिलाएँ खुशी के गीत गा रही थीं। देर रात होने पर दुल्हन को सुहागरात की सेज पर भेज दिया जाता है।
दुल्हन अपने दूल्हे का इंतजार कर रही होती है, तभी अचानक उसका देवर वहाँ आ जाता है। वह मुस्कुराते हुए मजाकिया अंदाज में अपनी भाभी से कहता है, “भाभी, भैया तो बहुत थक गए हैं। सोचा, आज मैं ही सुहागरात मना लूँ।”
देवर की यह बात सुनकर दुल्हन खिलखिलाकर हँस पड़ती है। वह इसे एक साधारण मजाक समझकर टाल देती है। कुछ देर बाद देवर वहाँ से चला जाता है, लेकिन उसके कहे हुए शब्द दुल्हन के मन में गूंजते रहते हैं।
इसके बाद दूल्हा कमरे में आता है और दोनों अपनी वैवाहिक जीवन की पहली रात साथ बिताते हैं। पहली रात तो गुजर जाती है, लेकिन दुल्हन के मन में देवर की कही हुई बात बार-बार आती रहती है।
धीरे-धीरे देवर और भाभी के बीच मजाक का सिलसिला बढ़ने लगता है। जब भी उन्हें मौका मिलता, वे एक-दूसरे से हँसी-मजाक करते। समय के साथ यह मजाक उन्हें एक-दूसरे के बेहद करीब ले आया। शायद उन्होंने खुद भी नहीं सोचा था कि उनका रिश्ता इस हद तक पहुँच जाएगा।
घर के किसी सदस्य को इस बारे में कोई अंदाजा नहीं था। जैसे-जैसे समय बीतता गया, दोनों की नजदीकियाँ बढ़ती गईं। वे ऐसे मौकों की तलाश में रहने लगे, जब घर में कोई न हो और वे अकेले मिल सकें।
एक दिन देवर ने अपनी भाभी से साफ शब्दों में कहा कि वह उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहता है। इसके बाद दोनों के बीच संबंधों का यह सिलसिला आगे बढ़ता चला गया।
किसी को भी इस बारे में भनक नहीं लगी। लेकिन एक दिन दोनों आपत्तिजनक स्थिति में थे, तभी घर का एक सदस्य अचानक वहाँ पहुँच गया। जैसे ही उसने यह दृश्य देखा, पूरे परिवार में हड़कंप मच गया।
अब वह राज छिपा नहीं रह सका। बात पूरे परिवार और आसपास के लोगों तक पहुँच गई। इसके बाद घटनाएँ इतनी तेजी से बदलीं कि मामला एक भयानक हत्या तक जा पहुँचा।
जब पुलिस ने इस हत्याकांड का खुलासा किया, तो सामने आई सच्चाई पर लोगों को विश्वास नहीं हो रहा था।
आज मैं आपको जो सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ, वह उत्तर प्रदेश के आगरा जिले की है। आगरा जिले के सदर थाना क्षेत्र में स्थित सुल्तानपुरा छोटी बस्ती में यह घटना सामने आई।
17 जून 2026 की सुबह लगभग 9 बजे का समय था। एक राहगीर अपने रास्ते से गुजर रहा था। अचानक उसे शौच के लिए जाना पड़ा। वह सड़क किनारे मौजूद झाड़ियों की ओर चला गया।
शौच करने के बाद जैसे ही वह खड़ा हुआ, उसकी नजर पास ही एक व्यक्ति पर पड़ी, जो झाड़ियों के निकट लेटा हुआ दिखाई दे रहा था। पहली नजर में ऐसा लगा मानो वह आराम से सो रहा हो।
राहगीर उसके पास गया और उसे आवाज लगाई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। वह व्यक्ति एक गमछा या छोटी चादर ओढ़े हुए था। जब राहगीर ने वह कपड़ा हटाया, तो उसके होश उड़ गए।
उसने देखा कि लगभग 22 से 23 वर्ष का एक युवक खून से लथपथ पड़ा हुआ था। उसका चेहरा और शरीर गंभीर रूप से घायल थे। यह दृश्य देखकर राहगीर जोर-जोर से चीखने और चिल्लाने लगा।
उसकी आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुँचने लगे। देखते ही देखते सुल्तानपुरा छोटी बस्ती के सैकड़ों लोग वहाँ जमा हो गए। इसी दौरान किसी ने पुलिस को सूचना दे दी।
सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम और सदर थाने की पुलिस मौके पर पहुँच गई। वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर आ गए।
पुलिस के सामने कई सवाल थे—यह शव किसका है? यहाँ कैसे पहुँचा? इसकी हत्या किसने की? और हत्या के पीछे क्या वजह थी?
इसी बीच बस्ती का एक व्यक्ति वहाँ पहुँचा, जिसका नाम महेश था। शव का चेहरा बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुका था और खून से सना हुआ था, इसलिए पहचान करना मुश्किल था।
लेकिन महेश ने युवक के कपड़ों को देखकर कहा, “यह मेरा दूसरा बेटा अमित उर्फ सोमू है, जिसकी उम्र लगभग 23 वर्ष है।”
जैसे ही महेश को अपने बेटे की पहचान हुई, वह जोर-जोर से रोने लगा। उसकी चीख-पुकार से माहौल और भी गमगीन हो गया।
पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों ने किसी तरह उसे संभाला। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू होते ही पुलिस ने हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए अपनी जांच तेज कर दी।…पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें