Crime

दीपावली पर खून का बदला खून से

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सोनीपत, हरयाणा
कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक लड़का अपनी नानी के यहां चला जाता है। मामा की दुकान पर रहता है। काम करना शुरू कर देता है। इसी बीच में दीपावली का त्यौहार आता है। तो वह दीपावली मनाने के लिए वो अपने घर आता है। अपनी माता अपने पिता के पास। जब वहां आता है तो दीपावली पूरी हो जाती है। उसके बाद उसको जाना था और अचानक ही वह गायब हो जाता है। पूछा जाता है कि नानी के घर तो नहीं पहुंच गया? लेकिन वहां से जब बातचीत होती है तो पता चलता है कि वो नानी के घर पर नहीं है। अब उस लड़के को हर जगह तलाश किया जाता है। चार-पांच दिन बीत जाते हैं। तब जाकर पता चलता है कि उसकी लाश जंगल में पड़ी हुई है। झाड़ियों के बीच में पड़ी हुई है। उसको जानवर नोच कर खा रहे हैं।

बस इतना था घर वालों को जब यह बात पता चलती है तो परिवार वालों का रो-रो कर बुरा हाल हो जाता है। आखिरकार जिसने कत्ल किया था, वह भी पकड़े जाते हैं। यहीं पर एक शर्त रखी जाती है कि अब आगे भी कत्ल होगा। यानी कि इसका बदला हर हाल में लिया जाएगा। लेकिन इसका बदला ले लिया जाएगा, तो दीपावली के बाद ही लिया जाएगा। अब ऐसी स्थिति में यह कोशिश करना शुरू कर देते हैं कि कब दीपावली आएगी और कब उसे मारेंगे। जिसने यह कत्ल किया है। तो ऐसे ही करते-करते 1 2 3 4 5 दिवाली बीत जाती हैं।

पांचवी दिवाली पर मौका मिलता है और कत्ल होता है। वो भी बहुत भयानक रूप में। उस कत्ल की गूंज पूरे प्रदेश भर में फैल जाती है। आज की इस कहानी के माध्यम से यही जानने की यही समझने की कोशिश करते हैं कि उसका कत्ल क्यों हुआ था और बाद में बदला लेने के लिए एक नहीं बल्कि दो और कत्ल हो जाते हैं।… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें

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