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दिव्या मिश्रा हत्याकांड: एक गोली, एक WhatsApp मैसेज और छिपा हुआ बड़ा राज!

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लखनऊ / उत्तर प्रदेश

लखनऊ में एक मिठाई वाला चौराहा है और मिठाई वाले चौराहे के पास ही एक बैंक है। बैंक का नाम है ICICI बैंक। ICICI बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर दिव्या मिश्रा काम करती हैं।

यह 20 अगस्त 2026 की दोपहर लगभग 12:30 बजे का वक्त था। दिव्या मिश्रा के पास एक कॉल आता है। जैसे ही कॉल आता है, वह बैंक से बाहर निकलती हैं। बैंक से थोड़ी ही दूर जाने के बाद वहां एक व्यक्ति उनका इंतजार कर रहा होता है।

उस व्यक्ति के साथ उनकी बातचीत शुरू होती है। अभी बातचीत को दो-तीन मिनट ही हुए थे कि उस व्यक्ति ने पिस्टल निकाल ली। पिस्टल निकालने के बाद उसने दिव्या मिश्रा के माथे पर गोली मार दी।

जैसे ही दिव्या मिश्रा को गोली लगी, वह जमीन पर गिर पड़ीं। इसके बाद गोली मारने वाला व्यक्ति मौका पाते ही वहां से तेजी से भागने लगा।

इधर, जब वह व्यक्ति भाग रहा था, तो आसपास मौजूद लोगों की नजर दिव्या मिश्रा पर पड़ी। कई लोग उन्हें जानते थे, क्योंकि वह उसी बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर काम करती थीं।

बैंक में जैसे ही इस घटना की सूचना पहुंची, बैंक के सभी कर्मचारी और अन्य लोग मौके पर पहुंच गए। वहां पहुंचकर उन्होंने देखा कि दिव्या मिश्रा खून से लथपथ पड़ी थीं।

उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इसके बाद सोशल मीडिया पर यह खबर बहुत तेजी से वायरल होने लगी। बताया जाने लगा कि दिव्या मिश्रा कोई और नहीं, बल्कि मशहूर पत्रकार प्रिय मिश्रा की बहन थीं।

जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया के अलग-अलग माध्यमों पर तेजी से वायरल हुई, हर किसी के अंदर यह जिज्ञासा पैदा होने लगी कि आखिर दिव्या मिश्रा की हत्या क्यों हुई? हत्या के पीछे की वजह क्या थी?

लेकिन जिसने हत्या की थी, यानी हत्यारे ने एक मैसेज लिखा था। उस मैसेज में लिखा था कि इस हत्या की वजह के बारे में प्रज्ञा मिश्रा सब जानती हैं।

आखिर इसके पीछे की पूरी कहानी क्या है? आज की इस कहानी के माध्यम से जानने और समझने की कोशिश करते हैं।

यह सच्ची घटना उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की है।

लखनऊ में एक थाना है, जिसका नाम गोमती नगर है। गोमती नगर थाना क्षेत्र में हुसड़िया चौराहा पड़ता है। हुसड़िया चौराहे के पास रहने वाला एक व्यक्ति, जिसका नाम अंकुर है, अपने घर में मौजूद था।

वह अपनी पत्नी से बातचीत कर रहा था। इसी बीच उसने अपना मोबाइल निकाला और WhatsApp पर स्टेटस चेक करने लगा।

जैसे ही उसने WhatsApp पर स्टेटस चेक किया और उसे देखा, अचानक उसकी चीख निकल गई। क्योंकि WhatsApp पर एक मैसेज लिखा हुआ था, जो वाकई अपने आप में बेहद असहनीय, परेशान करने वाला और सोचने पर मजबूर करने वाला था।

अंकुर ने अपनी पत्नी को वह मैसेज दिखाया। मैसेज दिखाने के बाद वह तुरंत उठता है और अपने बिल्कुल पास में रहने वाले एक व्यक्ति, जिसका नाम मानस वाजपेयी था, के घर की तरफ दौड़ना शुरू कर देता है।

जैसे-जैसे वह मानस वाजपेयी के घर की तरफ दौड़ रहा था, उसने आसपास के लोगों को भी आवाज लगाकर अपने पास बुलाने की कोशिश की। उसने लोगों से कहा कि जितनी जल्दी हो सके, आप लोग वहां पहुंचिए।

अब जितने भी लोग उसकी आवाज सुन रहे थे, वे तत्काल मानस वाजपेयी के घर की तरफ जाने लगे।

जैसे ही सभी लोग मानस वाजपेयी के घर के पास पहुंचे, उन्होंने दरवाजा खुलवाने के लिए बार-बार दस्तक दी और आवाज लगाई। लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही थी।

इसी बीच आसपास के लोगों ने कहा कि अब यह दरवाजा तोड़ना ही पड़ेगा।

जब दरवाजा तोड़ने की बात आई, तो सभी लोगों ने आपस में मशवरा किया। मशवरा होने के बाद सभी ने पूरी ताकत लगाई और मानस वाजपेयी के घर का दरवाजा तोड़ दिया।

दरवाजा टूटते ही सामने टेलीविजन चल रहा था। टीवी पर हनुमान चालीसा चल रही थी।

लेकिन इसके बाद लोगों ने जो दृश्य देखा, उसे देखकर सबकी आंखें खुली की खुली रह गईं।

जिस मानस वाजपेयी के लिए WhatsApp पर स्टेटस और मैसेज लगाया गया था, वह सामने खून से लथपथ पड़ा हुआ था।

थोड़ी ही दूरी पर मानस वाजपेयी की बहन भी पड़ी हुई थी, जिसका नाम शीबा वाजपेयी था। शीबा की उम्र लगभग 28 साल थी, जबकि मानस की उम्र लगभग 35 साल के आसपास थी।

भाई और बहन दोनों ही खून से लथपथ पड़े हुए थे।… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें

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