20 मार्च 2020 की यह बात है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तिहाड़ जेल है। तिहाड़ जेल नंबर तीन की यह बात है। मुकेश सिंह जिसकी उम्र लगभग 32 साल के आसपास होती है। पवन गुप्ता जिसकी उम्र 25 साल के आसपास होती है। विनय शर्मा जिसकी उम्र 26 साल के आसपास होती है। अक्षय ठाकुर जिसकी उम्र 31 साल के आसपास होती है। सुबह 4:00 बजे के आसपास का वक्त हो रहा था। जेलर साहब इनके पास पहुंचते हैं। इनको जगाया जाता है। हालांकि इन्हें नींद तो नहीं आ रही थी। थोड़े बेचैन थे, परेशान थे। उन्हें नए कपड़े दिए जाते हैं। नए कपड़े देने के बाद उनसे कहा जाता है जितनी जल्दी हो सके तैयार हो जाइए। तैयार होने के बाद नाश्ता पानी कर लीजिए। वो पूछते हैं कि सर क्या बात है? वो कहते हैं कि जेलर साहब आज तुम्हें फांसी दी जाएगी। जैसे ही फांसी की बात सुनते हैं वो चारों के चारों रोने लगते हैं। गिड़गिड़ाने लगते हैं और हाथ जोड़ते हुए कहते हैं साहब हमें माफ कर दीजिए। हमसे गलती हुई। लेकिन कानून ने अपना फैसला सुना दिया था। अब आगे का पालन होना था।
चारों तैयार किए जाते हैं। तैयार करने के बाद फांसी के फंदे पर उनको लेके जाया जाता है। हाथ पीछे बांधे जाते हैं। चेहरे पर काला कपड़ा होता है। उसके बाद फिर गले में एक फंदा डाला जाता है। पवन जल्लाद इस काम के लिए तैयार था क्योंकि उसको लीवर खींचना था। जैसे ही पवन जल्लाद ने लीवर खींचा। लीवर खींचने के बाद इस घटना की गूंज पूरे हिंदुस्तान भर में फैल जाती है। हर किसी की जुबान पर एक ही बात की चर्चा हो रही थी कि इन्होंने बहुत ही क्राइम किया था। इन्होंने बहुत ही बुरा किया था। इसलिए सरकार ने इनको फांसी दे दी है। कानून ने इनको फांसी दे दी है। यह अच्छा किया। इससे लोगों में एक सबक जाएगा और कुछ भी करने से पहले हजार बार लाख बार लोग सोचेंगे। घटना घटने लगती हैं। कुछ ना कुछ होने लगता है। फांसी दी जाती है। लेकिन कोई किसी पर असर पड़ता नहीं है।
इस फांसी को दिए हुए 6 साल, 4 महीने और 15 दिन बीत जाते हैं। 4 अगस्त 2026 की रात को ऐसी ही मिलती जुलती एक और घटना हो जाती है। जब एक और घटना हो जाती है तो उसकी गूंज जब चारों तरफ फैलती है लोग चर्चा करना शुरू कर देते हैं तो फिर से वही बात याद आने लगती है। 16 दिसंबर 2012 की वो रात यानी कि 13 वर्ष 7 महीने और 19 दिन पहले दिल्ली में चलती हुई बस में एक लड़की के साथ गैंगरेप होता है ना केवल गैंगरेप होता है बल्कि उस लड़की के शरीर में शायद ही कोई ऐसा हिस्सा रहा होगा जहां पर उसे दर्द तकलीफ ना दी गई होगी जब ये बात देशवासियों को पता चलता है तो देशवासी सड़कों पर उतर आते हैं। संभवतः भारत के इतिहास की ये पहली ऐसी घटना रही थी जिस घटना को लेकर पूरे देश के लोग एक पायदान पर आ जाते हैं और इस बात को लेकर बहुत ज्यादा रोश था।
फिर यह पब्लिक को सबक दिखाने के लिए सबक सिखाने के लिए एक मैसेज देने के लिए कि अगर किसी ने भविष्य में कोई इस तरह की घटना करने की कोशिश की तो जैसे इन चारों को फांसी के फंदे पर लटकाया गया उनको भी बिल्कुल वैसे ही लटका दिया जाएगा। कानून भी बना। कानून में बदलाव भी किए गए। फांसी भी दी गई। लेकिन अपराध कहां रुकता है? अपराध तो होता ही चला जाता है और जब यह अपराध होता है तो इस बात की भी गूंज फैलने लगती है। लेकिन अफसोस की बात यह होती है पुलिस दावा कर रही है कि जिस दिन घटना हुई है घटना के महज 5 घंटे के बाद ही आरोपियों को हमने पकड़ लिया गिरफ्तार कर लिया और लेकिन इस घटना का जो खुलासा होता है उसे पुलिस को खुलासा करने में 27 दिन का वक्त लगता है। यानी कि किसी को भी इस बात का एहसास नहीं होने दिया जाता 27 दिन तक कि दिल्ली में इतनी बड़ी घटना भी हुई है।
क्या है वो घटना? किसके साथ घटना हुई है? आज की इस कहानी के माध्यम से जानने और समझने की कोशिश करते हैं। आदाब नमस्कार सत श्री अकाल। मैं उस्मान सैफी। आज की जो घटना मैं आपको सुनाने जा रहा हूं। यह घटना है 4 अगस्त 2026 की रात लगभग 12:00 बजे के आसपास का वक्त हो रहा था। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कश्मीरी गेट यानी कि आईएसबीटी के पास जो रिंग रोड है। रिंग रोड पर एक 16 या 17 साल के आसपास की एक लड़की होती है। जिसके कपड़े अस्त-व्यस्त होते हैं। जिसके चेहरे पर एक मायूसी थी। डर था, खौफ था। आंखों में आंसू थे। रो रही थी।
इसी बीच में एक ऑटो वाले की उस लड़की पर नजर पड़ जाती है। उस लड़की को देखता है। देखने के बाद उससे कहता है पूछता है बेटा क्या हुआ? तुम परेशान क्यों हो? तुम्हारे कपड़े अजीब से क्यों हो रहे हैं? तुम्हें कुछ हुआ है? क्या मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकता हूं? जैसे ही ऑटो वाले ने यह बात कही उस लड़की के दिमाग में कुछ ऐसी इमेज बनती है कि जैसे कि उसके परिवार के ही सदस्य हो। जिस तरह से वो पूछ रहा था। जिस तरह से वह तसल्ली दे रहा था। वो लड़की एकदम से जोर-जोर से रोने लगती है। रोते-रोते अपनी जो दर्द था, अपनी तकलीफ थी, वह बयां करती है।
और जैसे ही उस ऑटो वालों ने यह बात सुनी तत्काल ही उस लड़की को अपने ऑटो में बिठाता है। ऑटो में बिठाने के बाद नजदीक में एक पुलिस स्टेशन पड़ता है जिसका नाम होता है कश्मीरी गेट। कश्मीरी गेट पुलिस स्टेशन में वो ऑटो वाला उस लड़की को लेके जाता है जिसकी उम्र लगभग 16 17 साल के आसपास होती है। जो लड़की ने अभी कहानी उस ऑटो वाले को बताई फिर वह तफसील से पुलिस वालों को यह बात बताना शुरू कर देती है। कहती है कि साहब उत्तर प्रदेश में मैनपुरी जिला है और मैनपुरी जिले में थाना किनी लगता है। किनी के पास एक गांव है। एक गांव की वो रहने वाली है। परिवार में उसकी मां भी है। उसके पिता भी हैं। उसकी भाई भी उसकी बहन भी सब के सब हैं।
लेकिन 3 अगस्त 2026 को मां ने मुझे पढ़ाई को लेकर डांट दिया था। मुझे इस बात पर बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था। सोच रही थी कि क्या करूं, क्या ना करूं। वो रात तो बीत जाती है लेकिन अगले ही दिन जब स्कूल में पढ़ने के लिए जाती है यानी कि 4 अगस्त 2026 को तो वो घर नहीं जाती। घर ना जाकर उसने सोचा क्यों ना अपने भैया के पास चला जाए। उसका भैया उत्तर प्रदेश के नोएडा में सेक्टर 63 लगता है। वहां पर उसका भाई रहता है। कहेगी कि भैया के पास रहूंगी दो चार छ दिन तो वहां पर थोड़ी तसल्ली हो जाएगी। वो तसल्ली के लिए अपने मन के सुकून के लिए अपने भाई के पास जाने के लिए चलती है और एक बस थी जो बस नोएडा की तरफ जा रही थी।
उस बस में जब वो बैठ जाती है, बैठने के बाद उसे अब सफर तय करना था 338 कि.मी. का लेकिन सफर उसका जब कंप्लीट हो जाता है, रात का अंधेरा था। लगभग 9:00 बजे के आसपास का वक्त हो रहा था। हल्की-हल्की बारिश भी पड़ रही थी। उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था। जहां उसको जाना था यानी कि उसको नोएडा सेक्टर 63 में जाना था। लेकिन गलती से वो ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर जाकर उतर जाती है और जैसे ही परी चौक पर जाकर उतरती है एक दो लोगों से बातचीत करती है इधर-उधर देखती है लेकिन उसको यह जगह कुछ नई नहीं लगती है यानी कि उसको सेक्टर 63 में जहां उतरना था वो जगह तो ये थी ही नहीं लड़की थोड़ी परेशान हो जाती है परेशान होने के बाद आराम से खड़ी हुई थी बारिश की वजह से कुछ लोग वहां पर दिखाई भी नहीं दे रहे थे दूर-दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था लेकिन इसी बीच में एक बस आकर रुकती है नई जैसी बस होती है और जैसी नई जैसी बस होती है तो उसने उस बस की तरफ को हाथ लिया इशारा किया और जैसे इशारा करती है तो वह बस रुक जाती है।
बस रुक जाती है। बस रुकने के बाद कंडक्टर बाहर झांक कर देखता है। देखते हुए कहता है कि कहां जाना है? कहां नहीं जाना है? तो लड़की बताती है कि मुझे सेक्टर 63 जाना है नोएडा। क्या आपकी गाड़ी उधर ही जा रही है? तो जैसे ही उस लड़की ने यह बात कही तो कंडक्टर कहता है कि हां हां यह तो हमारी बस वहीं तक जा रही है। तुम्हें जाना है तो आ जाइए। बैठ लीजिए।
जैसे ही खिड़की खोली जाती है। लड़की अंदर प्रवेश करती है। अंदर प्रवेश करने के बाद एयर कंडीशनर बस होती है। बिल्कुल नई बस जिस पर लगभग पर्दे पड़े हुए हैं। उसमें कोई दिक्कत नहीं, कोई परेशानी नहीं। लेकिन लड़की को पहली ही प्रथम दृश्य ही आभास हो जाता है कि कुछ गड़बड़ है। गड़बड़ इसलिए क्योंकि वहां पर जो बस में एक भी सवारी उसको नजर नहीं आती है।
जैसे उसने अंदर झांक के देखा झांकने के बाद उसे कोई नजर नहीं आता है। तो जिस कदम वो आगे बढ़ी थी, वैसे ही कदम उसने पीछे हटाने शुरू कर दिए। और जैसे कदम उसने अपने पीछे हटाए, अंधेरा था। वहां आसपास कोई था भी नहीं। कंडक्टर ने अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए क्योंकि उसका वजूद ज्यादा था। लड़की का वजूद हल्का था। उसने लड़की को पकड़ा। पकड़ने के बाद एकदम से खींचा और खींचने के बाद जल्दी से अपनी खिड़की बंद कर लेता है। अब जैसे ही उसने खिड़की बंद की है तो उस लड़की ने जोर-जोर… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें….