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एक दरोगा और एक भूत की कहानी

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मेरठ, उत्तर प्रदेश
यह बात सन 2017 की है उन दिनों हिंदुस्तान अखबार के लिए मैं रिपोर्टिंग कर रहा था अभी कोतवाली के अंदर इंस्पेक्टर ने ज्वाइन ही किया था और जैसे ही वह ज्वाइन करते हैं तो चुनाव था नगर निकाय का पोलिंग पार्टी आ रही थी और इसी बीच मेरे पास इंस्पेक्टर का फोन आता है इंस्पेक्टर साहब ने फोन किया कि मुझे आपसे बात करनी है मिलना है। मैं पहुंच जाता हूं क्योंकि मैंने कभी इंस्पेक्टर को देखा नहीं था और इंस्पेक्टर ने मुझे नहीं देखा था

तो जैसे मैं जाकर सामने खड़ा होता हूं तो वहां पर कोतवाली के अंदर बहुत सारे पुलिस वाले पहले से मौजूद थे जिन्हें अलग-अलग भूतों के लिए रवाना किया जाता था इसी बीच में इंस्पेक्टर साहब देखते हैं मुझे कहते हैं कि बताइए क्या बात है? क्यों यहां पर खड़े हो? तो मैंने कहा कि सर अभी आपका फोन पहुंचा था और मेरा नाम उस्मान सैफी है

बोले हां हां मैंने फोन किया था भाई काम करिए आपको 200 लोगों के खाने का इंतजाम करना है हालांकि जो पुलिस वाले हैं वह लोग 500 हैं लेकिन आपको 200 का इंतजाम करना है मैं समझ नहीं पा रहा था कि पत्रकार से खाने के इंतजाम के लिए बात कर रहे हैं इससे पहले कि मैं कुछ हां या ना का जवाब दे पाता एक और इंस्पेक्टर उनके बराबर में खड़े हुए हैं वह कहते हैं कि जिससे तुम खाने के लिए बोल रहे हो वह पत्रकार है अखबार में छाप देगा तो तुम्हारी बैंड बजा देगा इंस्पेक्टर साहब समझ नहीं पा रहे थे कि… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें

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