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Crime

सास और दामाद का अफेयर और फिर एक का क़त्ल

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अररिया, बिहार
11 अप्रैल 2026 की यह बात है। एक बारात आती है और उसका धूमधाम से स्वागत किया जाता है। जब सभी बाराती आ जाते हैं, उसके बाद दूल्हा भी पहुँच जाता है। यहीं से कुछ औरतें इकट्ठी होती हैं। उनकी इच्छा होती है कि चलकर दूल्हे को देखा जाए।

कुछ महिलाएँ और लड़कियाँ एक साथ वहाँ पहुँच जाती हैं, जहाँ दूल्हा बैठा हुआ था। वे उसके काफी करीब तक पहुँचकर उसे देखने लगती हैं। दूल्हे को देखते-देखते महिलाओं के बीच आपसी चर्चा शुरू हो जाती है। कोई कहती है कि दूल्हा अच्छा लग रहा है, तो कोई उसके बारे में अलग राय देती है।

बातचीत के दौरान कुछ महिलाएँ कहती हैं कि दूल्हे की उम्र दुल्हन की उम्र से लगभग दोगुनी है। यानी दुल्हन बहुत छोटी है और दूल्हा उससे काफी बड़ा। वे पूछने लगती हैं कि आखिर इस दूल्हे में ऐसा क्या देखा गया कि उससे शादी तय की गई।

बातों-बातों में यह चर्चा शुरू हो जाती है कि यह रिश्ता किसने पसंद किया था। दुल्हन के कुछ करीबी रिश्तेदारों में मौजूद महिलाओं में से एक-दो महिलाएँ बताती हैं कि दुल्हन की माँ को यह दूल्हा बहुत पसंद था। उन्होंने जिद कर ली थी कि उनकी बेटी की शादी होगी तो इसी व्यक्ति से होगी, नहीं तो किसी से नहीं होगी।

यह सुनकर कुछ महिलाएँ गुस्से में तंज कसते हुए कहती हैं, “अगर दूल्हा इतना ही पसंद था, तो माँ खुद उससे शादी कर लेती। कम से कम बेटी का नसीब तो नहीं फोड़ती।”

यह बात भले ही मजाक में कही गई थी, लेकिन किसी को नहीं पता था कि दुल्हन की माँ और उस दूल्हे के बीच पहले से ही प्रेम संबंध चल रहा था। जब इस बात का खुलासा हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी, क्योंकि एक हत्या हो चुकी थी।

हत्या की खबर चारों ओर फैल जाती है। पुलिस मामले की जाँच में जुट जाती है और शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू करती है। जब लोगों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिलती है, तो उन्हें विश्वास नहीं होता कि रिश्तों का स्वरूप आखिर किस दिशा में जा रहा है और समाज के भीतर क्या हो रहा है।

1 जून 2026 की रात लगभग 11 बजे का समय था। बिहार राज्य के अररिया जिले के आर.एस. थाना क्षेत्र के प्रेमनगर, वार्ड नंबर 16 में एक घटना सामने आई।

साजिदा परवीन नाम की एक लड़की को उसका पति अबू नसर मोटरसाइकिल पर बैठाकर किसी तरह उसके मायके लाता है। वहाँ पहुँचकर वह उसे बिस्तर पर लिटा देता है और फिर चला जाता है।

इसके बाद साजिदा के पिता मुदस्सिर को सूचना दी जाती है कि उसका दामाद अबू नसर आया था और साजिदा को छोड़कर चला गया है। जब मुदस्सिर अपनी बेटी के पास पहुँचता है, तो वह उससे बात करने की कोशिश करता है। वह कई बार उसे आवाज देता है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता।

इस पर उसे चिंता होने लगती है कि उसकी बेटी बिल्कुल शांत क्यों है और बात क्यों नहीं कर रही। वह उसकी नब्ज टटोलता है, लेकिन कोई हलचल महसूस नहीं होती। तुरंत एक स्थानीय डॉक्टर को बुलाया जाता है। डॉक्टर जाँच के बाद बताते हैं कि लड़की की मृत्यु हो चुकी है।

मुदस्सिर अपनी बेटी को मृत अवस्था में देखकर टूट जाता है। उसके शरीर पर एक-दो जगह चोट के निशान भी पाए जाते हैं। यह देखकर पूरे घर में चीख-पुकार और मातम का माहौल बन जाता है।

रात के 11 बजे की यह घटना धीरे-धीरे पूरे इलाके में फैलने लगती है। अगली सुबह लगभग 7 बजे तक पूरे मोहल्ले में यह खबर आग की तरह फैल जाती है। लोग आपस में चर्चा करने लगते हैं। हर किसी की जुबान पर एक ही बात होती है कि लड़की की उम्र बहुत कम थी और उसकी इतनी जल्दी शादी नहीं होनी चाहिए थी।

बताया जाता है कि साजिदा की उम्र मात्र 16 वर्ष थी, जबकि उसका पति लगभग 35 वर्ष का था। यानी दोनों की उम्र में लगभग दोगुना अंतर था। लोग सवाल उठाने लगे कि आखिर माता-पिता को इतनी जल्दी क्या थी कि उन्होंने इतनी कम उम्र में बेटी की शादी कर दी।

जब लोग मुदस्सिर के पास पहुँचते हैं, तो वह सिर पकड़कर रो रहा होता है और अपनी बेटी को याद कर रहा होता है। बताया जाता है कि साजिदा स्वयं यह शादी नहीं चाहती थी, लेकिन उसकी माँ इस विवाह के पक्ष में थी।

बाद में लोग इस मामले की गहराई से जानकारी लेने की कोशिश करते हैं। मीडिया भी इस घटना की कवरेज के लिए वहाँ पहुँच जाती है।

दरअसल, मुदस्सिर की पत्नी का नाम शाहिस्ता परवीन था, जिसकी उम्र लगभग 42 वर्ष थी, जबकि मुदस्सिर स्वयं लगभग 45 वर्ष का था। उनके घर में एक व्यक्ति का अक्सर आना-जाना था, जिसका नाम अबू नसर था और उसकी उम्र लगभग 35 वर्ष थी।

पिछले चार वर्षों से अबू नसर का घर में नियमित आना-जाना था। उस समय तक मुदस्सिर को इस संबंध में कोई विशेष जानकारी नहीं थी। लेकिन उसकी पत्नी शाहिस्ता परवीन और अबू नसर के बीच प्रेम संबंध विकसित हो चुके थे।… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें