लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश 22 अगस्त 2025 की दोपहर लगभग 12:00 बजे के आसपास का वक्त हो रहा था। एक लड़का जिसकी उम्र लगभग 30 साल के आसपास रही होगी। पैरों में हवाई चप्पल, ब्लैक रंग की पट पहनी हुई थी। सफेद रंग की शर्ट जो कि प्रिंटेड थी। उसके उल्टे हाथ में यानी कि लेफ्ट साइड में उसके एक थैला लगा हुआ है। राइट साइड में कुछ कागज थे। वह लेके चले चला जा रहा है। रास्ते में एक दो महिला पुलिसकर्मी भी होती हैं। वो शायद उसे देखकर उसे एक फरियादी समझती हैं। वह फरियाद लेकर ही आया था। वह सीधा पहुंच जाता है लखीमपुर डीएम के कार्यालय में। वहां जब पहुंचता है तो बड़ी संख्या में अधिकारी बैठे हुए हैं।
अब चाहे सीडीओ हो, एसडीएम हो या बड़े-बड़े अधिकारी यहां पर बैठे हुए थे। इसी बीच में किसी की नजर पड़ जाती है उस लड़के पर। तो उस लड़के से पूछा जाता है कि भैया क्या बात है? किसी काम से आए हो क्या? वो कहता है कि साहब इस थैले के अंदर ना मेरा बेटा है। बेटे की लाश रखी हुई है। बस मैं आप लोगों के पास आया हूं। हाथ जोड़ते हुए रो रहा था। रोते-रोते कहता है कि साहब मेरा जो बच्चा है ना उसको जिंदा कर दो आप। बस मैं अपने बच्चे को जिंदा करवाने के लिए यहां पर आया हूं। अब यह आवाज उस हॉल के अंदर जिसमें सारे अधिकारी बैठे हुए थे उसमें बहुत तेजी के साथ गूंजने लगती है। धीरे से बात कर रहा था लेकिन वहां इतना सन्नाटा पसर जाता है कि बहुत दूर तक जो बैठे अधिकारी थे वहां तक भी आवाज़ पहुंच रही थी।
दरअसल वो रोते-रोते कहता है कि मेरा बच्चा है। दरअसल मेरी जो पत्नी है वो एक हॉस्पिटल में एडमिट है। वो कह रही थी कि बच्चा कैसा है तो वह उसे कह के आया है। झूठ बोल के आया है कि वह ठीक है लेकिन फिलहाल मशीन के अंदर रखा हुआ है। यह मशीन के अंदर नहीं है। थैले के अंदर है। देख सकते हो लाश है। इसे बस आप जिंदा कर दीजिए। इतना कहना था कि उस जगह पर जहां पर बड़े-बड़े अधिकारी बैठे हुए थे। हड़कंप मच जाता है। लोग सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। लेकिन जहां तक उसके रोने की आवाजें सिसियां पहुंच रही थी, वहां वहां तक वह सभी अधिकारी भावुक हो जाते हैं।.. पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें