भोजपुर, बिहार 17 जून 2026 की सुबह लगभग 9 बजे का समय था। बिहार पुलिस, एसटीएफ और स्थानीय थाने की संयुक्त टीम एक गाँव में पहुँची। उनका उद्देश्य लगभग 32 वर्षीय युवक भरत भूषण तिवारी को गिरफ्तार कर हिरासत में लेना था।
गिरफ्तारी की तैयारी के तहत पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली थी। पुलिसकर्मी आधुनिक हथियारों और बुलेटप्रूफ जैकेटों से लैस थे। सभी अपनी-अपनी रणनीतिक स्थिति संभाल चुके थे।
हालाँकि भरत भूषण तिवारी के खिलाफ कोई बड़ा आपराधिक इतिहास नहीं था। उस पर न तो चोरी, डकैती या हत्या का कोई आरोप था और न ही उसके खिलाफ कोई गंभीर एफआईआर दर्ज थी। इसके बावजूद वह भी पूरी तैयारी में दिखाई दे रहा था।
जैसे ही उसे पुलिस के आने की सूचना मिली, वह उनकी ओर बढ़ने लगा। आसपास का इलाका कच्चे रास्तों और साधारण बस्ती वाला था। कुछ ही देर में उसका पुलिस से आमना-सामना हो गया।
शुरुआती बातचीत के बाद उसने अचानक पुलिस की ओर निशाना साधकर एक गोली चला दी। गोली चलते ही पुलिसकर्मी सतर्क हो गए और अपनी-अपनी सुरक्षित पोजीशन लेने लगे। इस दौरान वह युवक हँसता रहा, बातचीत करता रहा और बीच-बीच में धमकी भरी बातें भी करता रहा।
उसने कहा, “जब समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाई है और क्रांतिकारी बनने का फैसला किया है, तो हथियार उठाने की जरूरत भी पड़ेगी।”
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत का सिलसिला चलता रहा। यह पूरा घटनाक्रम लगभग 15 से 16 मिनट तक चला। फिर अचानक उसने अपनी पिस्तौल उठाई और पुलिस की ओर फेंकते हुए कहा, “मैंने सरेंडर कर दिया।”
उसके चेहरे पर मुस्कान थी और वह हँसते हुए आत्मसमर्पण की बात कर रहा था। इससे पहले तक ऐसा लग रहा था कि पुलिस और उसके बीच मुठभेड़ हो सकती है और दोनों ओर से गोलियाँ चल सकती हैं। पुलिस आसपास मौजूद ग्रामीणों को लगातार चेतावनी दे रही थी कि वे दूर हट जाएँ, क्योंकि किसी को भी गोली लग सकती है।
लेकिन जैसे ही उसने अपनी पिस्तौल फेंककर आत्मसमर्पण किया, घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया।
पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड हो रहा था और वह फेसबुक पर लाइव प्रसारण भी कर रहा था। कुछ लोगों को इसकी जानकारी थी, जबकि कई लोग इससे अनजान थे।
पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के कुछ ही क्षण बाद लगातार पाँच गोलियाँ चलने की आवाज सुनाई दी। बाद में पता चला कि जिस युवक ने कुछ समय पहले पुलिस पर गोली चलाई थी, जो पिछले 15 मिनट से बातचीत कर रहा था और फेसबुक पर लाइव था, उसे पाँच गोलियाँ लगीं।
वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हालाँकि उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि यह मामला आगे चलकर पूरे देश में चर्चा का विषय बन जाएगा। यदि वह फेसबुक पर लाइव न होता और यदि उसने आत्मसमर्पण के लिए अपनी पिस्तौल न फेंकी होती, तो शायद यह घटना इतनी बड़ी बहस का मुद्दा नहीं बनती।
सोशल मीडिया पर उसकी पुरानी पोस्टें तेजी से वायरल होने लगीं। कुछ पोस्टों में वह खुद को या अपने विचारों को चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों से जोड़ता दिखाई देता था।
इसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोग उसे “आधुनिक भारत का चंद्रशेखर आजाद” और “आज के दौर का भगत सिंह” कहने लगे। जैसे-जैसे उसकी पोस्टें वायरल होती गईं, वैसे-वैसे बिहार पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे।
पूरी बिहार पुलिस कटघरे में खड़ी दिखाई देने लगी और इस कथित एनकाउंटर को लेकर कई गंभीर प्रश्न उठने लगे।
आखिर भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के पीछे की कहानी क्या थी? यह कार्रवाई क्यों हुई? और इसके पीछे की पूरी सच्चाई क्या है?… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें