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केरल की रहस्यमयी कहानी

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कोझिकोड, केरल
4 जुलाई 2025 की यह घटना है। केरल राज्य के मलप्पुरम जिले में स्थित बोंगारा थाने में लगभग 55 वर्ष का एक व्यक्ति पहुंचता है। वह थानेदार के पास जाकर कहता है, “साहब, मुझे नींद नहीं आती। पिछले 40 वर्षों से मैं इस समस्या से परेशान हूं। जब भी मैं सोने की कोशिश करता हूं, मुझे बहुत परेशानी होने लगती है।

थानेदार उसकी बात सुनता है, लेकिन उसे यह बात कुछ अजीब लगती है। वह कहता है, “क्या तुम मानसिक रूप से बीमार हो? पागल तो नहीं हो गए हो? यह कैसी बात कर रहे हो? अगर किसी को नींद नहीं आती, तो इसमें पुलिस स्टेशन या थानेदार क्या कर सकता है?”

थानेदार को गुस्सा आ जाता है। वह उसे डांटते हुए कहता है, “जाओ, किसी डॉक्टर के पास जाओ और वहां से दवा लो।”

लेकिन वह व्यक्ति विनम्रता से कहता है, “साहब, मैं तो आपके पास ही आया हूं। आप मुझे गिरफ्तार कर लीजिए और जेल भेज दीजिए।”

थानेदार को लगता है कि शायद यह व्यक्ति बहुत अधिक परेशान है। वह उसे बैठाता है, चाय-पानी पिलवाता है और उसे तसल्ली देने की कोशिश करता है। इसके बाद वह उसे घर जाने के लिए कहता है।

लेकिन वह व्यक्ति फिर कहता है, “साहब, मुझे 40 साल से नींद नहीं आ रही है। जब भी मैं सोने की कोशिश करता हूं, एक डरावना चेहरा मेरी आंखों के सामने तैरने लगता है। उसकी खुली हुई आंखें मुझे दिखाई देती हैं और मैं घबराकर उठ बैठता हूं। हर रोज यही होता है। मुझे समझ नहीं आता कि मैं क्या करूं।”

थानेदार को महसूस होता है कि यह व्यक्ति सचमुच किसी गहरी परेशानी से गुजर रहा है। पहले भी उसे समझाने की कोशिश की गई थी, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली थी। इसलिए थानेदार उससे विस्तार से पूछताछ करता है। वह जानना चाहता है कि आखिर वह डरावना चेहरा उसे क्यों दिखाई देता है और इसके पीछे क्या कारण है।

पूरी कहानी सुनने के बाद पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेती है। गिरफ्तारी के बाद उसे जेल भेज दिया जाता है। लगभग 11 महीने जेल में रहने के बाद उसे जमानत मिल जाती है।

जब वह जमानत पर बाहर आता है, तो आसपास के लोग उससे पूछते हैं, “क्या अब तुम्हें नींद आती है या नहीं?”

वह मुस्कुराते हुए जवाब देता है, “साहब, अब मुझे बहुत अच्छी नींद आती है। अब कोई टेंशन नहीं है और न ही कोई दिक्कत है।”

आमतौर पर लोगों की जेल का नाम सुनकर ही नींद उड़ जाती है, लेकिन यह व्यक्ति ऐसा था जिसे जेल जाने के बाद चैन की नींद आने लगी।

यही कहानी धीरे-धीरे सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और अन्य समाचार माध्यमों पर वायरल होने लगी। लोग जानना चाहते थे कि आखिर इसके पीछे की असली कहानी क्या है? ऐसा क्या हुआ था कि उस व्यक्ति को जेल जाना पड़ा और जेल से लौटने के बाद उसकी वर्षों पुरानी अनिद्रा की समस्या समाप्त हो गई?

केरल राज्य में एक जिला है कोझिकोड। इसी जिले में तिरुवंबाडी नामक थाना क्षेत्र पड़ता है और तिरुवंबाडी क्षेत्र में कुदारंजी नाम का एक गांव स्थित है। इस गांव में एक जमींदार रहता था, जिसके यहां खेती-बाड़ी और अन्य कामकाज होते थे।

वर्ष 1986 की बात है। उस समय वहां लगभग 20 वर्ष का एक युवक काम करता था, जिसका नाम मोहन था। उसी स्थान पर एक और लड़का काम करता था, जिसकी उम्र लगभग 14 वर्ष थी और उसका नाम एंटनी था।

मोहन और एंटनी दोनों उस जमींदार के यहां मजदूरी का काम करते थे। यह कहानी वर्ष 1986 की है। जब-जब मोहन को मौका मिलता…पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें

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