उन्नाओ, उत्तर प्रदेश बचपन से ही वह लड़का दुबला-पतला था। उसे क्रिकेट खेलने का शौक था, लेकिन खेलने से कहीं ज़्यादा उसे क्रिकेट देखने का जुनून था। कहीं भी अगर मैच हो रहा होता, तो वह उसे छोड़ता नहीं था। अगर टीवी पर मैच आ रहा हो, तो उसे देखे बिना वह रुक ही नहीं पाता था। चाहे दिन हो या रात—जब देखो, क्रिकेट की दीवानगी उस पर इस कदर हावी रहती थी।
जैसे-जैसे वह बड़ा हुआ, उसका झुकाव क्रिकेट से कम और ऑनलाइन गेम्स की ओर ज़्यादा होने लगा। घरवालों को इसकी बिल्कुल भी भनक नहीं थी। कभी किसी की जेब से पैसे गायब हो जाते, कभी मम्मी के, कभी पापा के, कभी चाचा के—इस तरह से घर में चोरी होती रहती थी, लेकिन किसी को अंदाज़ा तक नहीं था कि घर का अपना बेटा ही यह सब कर रहा है।
एक दिन अचानक घर से सोने की एक चेन चोरी हो जाती है। जैसे ही चेन गायब होती है, घरवाले उसकी तलाश शुरू करते हैं। उसी दौरान यह खुलासा होता है कि घर का बेटा ऑनलाइन गेम खेलने की लत में फँस चुका है और उसी वजह से चोरी की घटनाएँ हो रही थीं।
उसके चाचा एक शस्त्र लाइसेंस की दुकान चलाते थे और उसके पिता की मेडिकल स्टोर की दुकान थी। परिवार मध्यम वर्ग का था—एक सामान्य, सादा जीवन जीने वाला परिवार। ज़िंदगी अपनी पटरी पर ठीक-ठाक चल रही थी। घरवालों ने बेटे को समझाया-बुझाया और कहा, “बेटा, ऑनलाइन गेम खेलने की ये आदतें बहुत गलत हैं। न जाने कितने लोगों की ज़िंदगी इससे बर्बाद हो चुकी है। हमसे वादा करो कि आगे से कभी ऑनलाइन गेम नहीं खेलोगे।”
लड़के ने अपने माता-पिता और परिवार वालों से वादा किया कि वह भविष्य में कभी ऑनलाइन गेम नहीं खेलेगा। लेकिन जब उसे समझाया गया, तो उसने अपने दोस्त से कहा, “यहाँ मन नहीं लगता, कहीं दूर चलते हैं।” वह गाँव में रहता था और एक सामान्य ज़िंदगी जी रहा था। दोस्त ने सुझाव दिया कि दिल्ली की तरफ चलते हैं।
वे दोनों गाँव से सीधे दिल्ली पहुँच जाते हैं। दिल्ली पहुँचने के बाद, जिस वादे के लिए घरवालों ने उसे रोका था, वह वादा वह तोड़ देता है और फिर से गेम खेलना शुरू कर देता है। ऐसे-ऐसे गेम खेलने लगता है, जिनकी किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
दरअसल, उसकी उम्र के लड़के हों या उससे बड़े या छोटे—सब उसे जानते और पहचानते हैं। कभी वह साइकिल चलाया करता था, और आज करोड़ों की गाड़ियाँ चलाता है। एक समय था जब उसके पास पैसे नहीं होते थे, और आज उसके पास लाखों नहीं, करोड़ों नहीं, बल्कि अरबों रुपये हैं। लोग उसे जानते हैं, पहचानते हैं।
लेकिन यह बात धीरे-धीरे लीक हो जाती है और मामला ईडी तक पहुँच जाता है। और ईडी का काम ही होता है यह जाँचना कि कहीं मनी लॉन्ड्रिंग तो नहीं हो रही, या पैसे किसी गलत तरीके से तो नहीं कमाए जा रहे।… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें