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IPL मैच के बाद बेंगलुरु में भगदड़ का पूरा सच

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बेंगलुरू, कर्नाटका
कर्नाटक प्रदेश में एक तुमकुरु जगह लगती है। दरअसल वहां का रहने वाला देवराज एंटी होता है जो कि बेंगलुरु के अंदर गोलगप्पे की दुकान चलाता है। 4 जून 2025 की शाम लगभग 5:30 बजे के आसपास पुलिस का उसके पास फोन पहुंचता है। पुलिस कहती है कि जितनी जल्दी हो सके बोरिंग हॉस्पिटल पहुंच जाओ। तुम्हारी बहुत सख्त जरूरत है। क्योंकि पुलिस का आदेश था इसको टाल नहीं सकता था। एक दो साथियों को लेकर सीधा बोरिंग हॉस्पिटल पहुंच जाता है। वहां जाकर कहता है कि साहब मेरे पास पुलिस का फोन आया था।

पुलिस वाले कहते हैं कि सीधे मोर्चरी में चले जाओ। मोर्चरी में जाने के बाद वहां देखना कि क्या तुम किसी को जानते हो, पहचानते हो। वो आदमी समझ ही नहीं पा रहा था देवराज एंटी कि आखिरकार पुलिस उससे ऐसा क्यों कह रही है। तभी एक सिपाही उसे अपने साथ लेके जाता है मोर्चरी के अंदर। वहां लगभग 11 लाश रखी हुई थी। 11 लाश को दिखाने के बाद वो कहता है कि क्या तुम इनमें से किसी को पहचानते हो? देवराज एंटी ने एक-एक लाश को देखना शुरू किया और जैसे ही एक अंतिम लाश के पास पहुंचता है तो उसकी चीख निकल जाती है। चिल्लाने लगता है, रोने लगता है और रोते-रोते कहता है कि साहब इसका कुछ भी मत करना। पोस्टमार्टम वगैरह कुछ मत करना और इसको चीरना मत, फाड़ना मत, कुछ मत करना। इस तरह की बातें करने लगता है।

उसे रोका जाता है, उसे समझाया जाता है। उससे पूछा जाता है कि कौन है यह? वो कहता है कि साहब मेरा बेटा है। मैं गोलगप्पे की दुकान भले ही चलाता हूं लेकिन मैंने कभी भी इसको अपने पास नहीं बुलाया। काम नहीं करने दिया। बस मैं चाहता था कि पढ़ लिखकर एक बड़ा इंसान बने, बड़ा आदमी बने। मैं नहीं चाहता था कि छोटा-मोटा काम करे।… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें