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Crime

दिल्ली में तरुण कुमार के क़त्ल की पूरी कहानी

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उत्तम नगर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली

मैंने एक बार गूगल से सवाल किया कि इस दुनिया में सबसे ज्यादा साफ और स्वच्छ वस्तु क्या है। गूगल ने जवाब दिया कि इस दुनिया में सबसे ज्यादा स्वच्छ वस्तु जल है और उसके साथ प्रकाश भी है।

प्रकाश का इस्तेमाल हम साफ-सफाई के लिए नहीं कर सकते, लेकिन जल का इस्तेमाल हम हमेशा सफाई के लिए करते हैं। क्योंकि उससे ज्यादा स्वच्छ कुछ नहीं माना जाता।

अगर हमारे हाथ गंदे हो जाएं, कपड़े गंदे हो जाएं, शरीर गंदा हो जाए, घर गंदा हो जाए या कोई भी चीज गंदी हो जाए, तो उसे साफ करने के लिए हम पानी का ही इस्तेमाल करते हैं।

अगर साफ पानी किसी इंसान के ऊपर गिर भी जाए, तो उससे वह इंसान नापाक नहीं हो सकता।

लेकिन इसी तरह की एक घटना में एक महिला के ऊपर थोड़ा सा पानी गिर जाता है और उस महिला के दिमाग में यह बात बैठ जाती है कि उसके कपड़े पूरी तरह नापाक हो गए हैं और अब वह नमाज अदा नहीं कर सकती।

यह वही महिला है जिसके घर में कपड़ों की रंगाई का काम होता है। जब कपड़ों की रंगाई होती है, तो रंग के छींटे अक्सर कपड़ों पर पड़ते होंगे। लेकिन तब शायद उसके मन में यह विचार कभी नहीं आता होगा कि उसके कपड़े खराब हो गए हैं या नापाक हो गए हैं।

उस समय उसके दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी कि जो पानी उसके ऊपर गिरा है, वह होली के रंगों का पानी था। और उसी वजह से वह अपने कपड़ों को नापाक मानने लगी।

उसने इस बात को लेकर इतना शोर मचाया, इतना हंगामा किया कि उस शोर और ड्रामे से न केवल उसका अपना घर बर्बाद हो गया, बल्कि जिस घर पर उसने उंगली उठाई थी, उस घर की एक मासूम जिंदगी हमेशा के लिए बुझ गई।

इस घटना की गूंज चारों तरफ फैल गई और लोग सोचने पर मजबूर हो गए कि आखिर ऐसा कैसे हो गया।

जब पुलिस उस महिला को गिरफ्तार करने के लिए जगह-जगह दबिश दे रही थी, तो वह महिला छुपती फिर रही थी। लेकिन आखिरकार जब वह पुलिस के सामने आई, तो हाथ जोड़कर बस एक ही बात कहने लगी—

“मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है। मुझे माफ कर दो। काश समय को पीछे ले जाने वाली कोई मशीन होती। काश समय को वापस करने की कोई ताकत होती। अगर समय वापस जा सकता, तो मैं अपनी उस गलती को सुधार लेती। लेकिन अब यह गलती ऐसी हो चुकी है जिसे कभी सुधारा नहीं जा सकता। इससे बस एक सबक लिया जा सकता है कि भविष्य में कोई ऐसी गलती फिर कभी न हो।”

यह घटना 4 मार्च 2026 की शाम की है। उस दिन होली का त्योहार था। लोग होली खेलकर नहा-धोकर साफ-सुथरे कपड़े पहनकर अपने-अपने काम में लग गए थे और इधर-उधर घूम रहे थे।

इसी दौरान उसी इलाके में रहने वाली लगभग 7 साल की एक बच्ची अपने घर की दूसरी मंजिल पर खड़ी थी। उसके हाथ में पानी से भरा एक गुब्बारा था।

वह छुपकर नीचे अपने ताऊजी को देख रही थी। उन्हें देखते-देखते उसके मन में एक शरारती ख्याल आया कि क्यों न एक बार गुब्बारा ताऊजी पर फेंका जाए।

उसने सोचा कि जैसे ही गुब्बारा ताऊजी को लगेगा, तो वह उसे डांटेंगे या फटकारेंगे। तब वह हंसते हुए कह देगी—
“ताऊजी, बुरा न मानो, होली है!”

इसी तरह के शरारती ख्याल उसके दिमाग में चल रहे थे।

उसने अपने ताऊजी को ध्यान से देखा, गुब्बारे का निशाना लगाया और जैसे ही उसने गुब्बारा उनकी तरफ फेंका… पूरी कहानी जानने के लिए नीचे वीडियो पर क्लिक करें